"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

गुरुवार, अगस्त 12, 2010

सबसे अच्छा उपहार होती है : बेटी : सरस चर्चा ( 9 )

धीरे-धीरे सभी नन्हे दोस्त छायांकन सीखते जा रहे हैं!
पहले आदित्य, फिर पाखी, उसके बाद अक्षयांशी
और अब रिमझिम ने भी छायांकन सीखना शुरू कर दिया है!

कन्हैया बनी हूँ मैं

उसने कितना सुंदर फ़ोटो खींचा है! आप भी देखिए -


आदित्य के विद्यालय में
बहुत बढ़िया-बढ़िया चीज़ें बनाना सिखाया जाता है!
इस बार विद्यालय से वापस लौटकर घर में उसने क्या बनाया है!
कुछ नानी को भी दिखाया है!
आपको भी सीखना है, तो सीधे उसके ब्लॉग पर चले जाइए!


पाखी ने अपने "पा" को
उनके जन्म-दिन पर यह बेमिसाल तोहफा दिया!
पाखी का कहना है -
जन्मदिन पर पापा को मैंने भी दी खूब बधाई!
सबसे अच्छे मेरे पापा खुशियों की बारात आई!


पाखी के पापा का जन्म-दिन 10 अगस्त को था!
यह देखिए उसके पापा का फ़ोटो!
यह तो आप समझ ही सकते हैं कि ये पापा
इतने नन्हे-मुन्ने क्यों लग रहे हैं!


माधव को उसकी नानी ने उपहार में यह साइकिल दी!
अब तो माधव बहुत मज़े से इसकी सवारी करेगा!


लेकिन कैसे?
साइकिल को हाथ में लेकर यही तो सोच रहा है, बेचारा माधव!
कोई बात नहीं, माधव बेटा!
अगली बार जब नानी आएँगी, तो ऐसी साइकिल दिलवाएँगी,
जिस पर बैठकर तुम ख़ूब मस्ती कर सको!


- यह है लविज़ा की अपील -


16 अगस्त को नन्ही परी इशिता का जन्म-दिन है!
पूरी मस्ती के साथ वह अपना जन्म-दिन मनानेवाली है!
आप सब बधाई और शुभकामनाएँ देने के लिए तैयार रहिए!


सरस पायस पर इस बार पढ़िए : यह गीत!

कहो अँधेरा,
कब तक-कब तक?
हो ना जाए सुखद सवेरा,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!


डॉ. नागेश पांडेय संजय

और एक बालकविता मेरी भी!



उपवन-उपवन
लगा चहकने
ओढ़ दुशाला हरियाली का!
रंग-बिरंगे फूल
खिल उठे
किलक उठा मन हर माली का!


रावेंद्रकुमार रवि

रविवार, अगस्त 08, 2010

तब तक-तब तक : डॉ. नागेश पांडेय संजय का एक शिशुगीत

तब तक-तब तक
----------------------------------------

कब तक-कब तक?
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!


रिमझिम-रिमझिम,
कब तक-कब तक?
बादल के झोलों में है जल,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

भूख लगी है,
कब तक-कब तक?
खाना-पानी दें ना नानी,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

मेल-दोस्ती,
कब तक-कब तक?
जब तक झगड़े को हम रगड़ें,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

कहो अँधेरा,
कब तक-कब तक?
हो ना जाए सुखद सवेरा,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!


डॉ. नागेश पांडेय संजय

शुक्रवार, अगस्त 06, 2010

किलक उठा मन : रावेंद्रकुमार रवि की एक बालकविता

किलक उठा मन

बादल मशकें
भर-भर लाए
सागर के पानी से नभ में!
लगे छिड़कने
फिर यह पानी
वे धरती के हर उपवन में!



गरमी से आकुल
धरती पर
जब पानी का पड़ा फुहारा!
लगी पुलकने
खुश हो धरती
भूल गई अपना दुख सारा!



उपवन-उपवन
लगा चहकने
ओढ़ दुशाला हरियाली का!
रंग-बिरंगे फूल
खिल उठे
किलक उठा मन हर माली का!


रावेंद्रकुमार रवि

बुधवार, अगस्त 04, 2010

बहुत सुरीली थी : चुलबुल की गुनगुन : सरस चर्चा ( 8 )

हवा घुस गई है बालों में, आँखों में है रंगत आई!
मची गुदगुदी है गालों में, ओंठों पर मुस्कान सजाई!


इस बार इशिता ने अक्सा बीच पर ख़ूब मस्ती करते हुए
अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाई!


मार्वे बीच पर उसने चश्मा लगाकर
पानी में भी ख़ूब छपाक-छइ की! हम भी करें चलकर!


३१ जुलाई को अक्षयांशी ने अपनी छोटी बहन
पौच का जन्म-दिन बहुत ख़ुशी के साथ मनाया!
वैसे तो उसका नाम पलक है,
पर प्यार से सब उसे पौच जी कहते हैं!
अब वह एक साल की हो गई है!
चलिए, उसके ब्लॉग पर चलकर उसकी बहना को बधाई देते हैं!


रिमझिम ने अपना घर
झिलमिलाते सितारों से भरकर
तितलियों को उसमें रहने की जगह दे दी!
एक सुंदर-सी कविता भी रची!
आइए, चलकर उसकी कविता पढ़ते हैं!


आप मोबाइल से कैसी-कैसी बातें करते हैं?
बाल-दुनिया पर इस बार मोबाइल से
अच्छी-अच्छी बातें करना सिखाया जा रहा है!
हम भी यह कविता पढ़ने चलते हैं!


आदित्य ने लैपटॉप पर एम. एस. वर्ड में लिखना शुरू कर दिया है!
हम उसके जल्दी स्वस्थ होने की कामना करते हैं,
क्योंकि वह बुखार से जूझ रहा है!
आप ख़ुद ही देख लीजिए -
आदि का चेहरा ही सब कुछ बता रहा है!


पाखी को एक और तोहफा मिला है!
एक क़िताब के मुखपृष्ठ पर उसका फ़ोटो छापा गया!
पाखी को बहुत-बहुत बधाई!


माधव के नानी-नाना आजकल दिल्ली आए हुए हैं!
वह उनके साथ ख़ूब मौज़ मना रहा है!
नानी से मालिश करवा रहा है और ख़ूब घूम रहा है!
सेंट्रल पार्क, कनाट प्लेस में उसकी मस्ती देखिए!


"सरस पायस" पर पहले नाचने-गाने की बात हुई!


फिर "सरस पायस" पर कुछ नन्हे-प्यारे चूज़े भी मुस्कराए!


लेकिन आज "सरस पायस" बहुत उदास है!



मंगल 3.08.2010 की सुबह 5.०० बजे सब कुछ अमंगल करके .............



सपनों में खोई रूपाली, लगती थी : ख़ुशियों की डाली!


लेकिन अब यह रूपाली हमेशा के लिए सपनों में खो गई है!

चुलबुल, दु:ख की इस घड़ी में हम सब तुम्हारे साथ हैं!

गुनगुन फिर से आएगी! एक नई रुनझुन के साथ!

फूलों की तरह फिर से मुस्कराएगी तुम्हारे साथ!


रावेंद्रकुमार रवि
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