"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

शनिवार, अगस्त 21, 2010

प्यारी-प्यारी इस चर्चा में प्यार बहुत है : सरस चर्चा (10)

इस बार हम सबसे पहले मिलते हैं
एक नई दोस्त से, जिसका नाम है : मलक मेहता!


मलक ने अभी चौथीं कक्षा में प्रवेश लिया है!
वह डीपीएस स्कूल, सूरत की छात्रा है!
इन दिनों वह पूरी लगन के साथ नृत्य सीख रही है!
चित्रकारी से उसे विशेष लगाव है!
चित्रों के प्रति उसका यही लगाव उसके बनाए गए
चित्रों की ताज़गी को हमेशा बरकरार रखता है!
आप ख़ुद ही देख लीजिए!


एक और नए दोस्त हैं : स्पर्श!


इन्होंने अपनी माँ के लिए यह कंप्यूटर बनाया है!


अब मिलते हैं, इस लाडली से,
जो बेटियों के ब्लॉग पर
अपनी अनुपम मुस्कान बिखेर रही है!
तब नहीं होता इसकी ख़ुशी का ठिकाना,
जब देख लेती है, किसी दर्पण में
अपना खिलखिलाता हुआ चेहरा!


चुलबुल ने अपना स्वतंत्रता-दिवस कुछ इस तरह से मनाया!


और यह रहा रिमझिम का पंद्रह अगस्त!


पाखी ने इस सप्ताह ख़ूब मस्ती की मायाबंदर के साथ!


और हमको दिखाए एक द्वीप के मनोहारी दृश्य!


आदित्य की तबियत अब ठीक है!
दवाई खाने के बाद इनके मुख पर सजी
यह मंद-मंद मुस्कान शायद यही कह रही है!


और यह देखिए, कौन है, जो माखन खाने जा रहा है!
इस नटखट दोस्त की "मुलरी" के बारे में
एक मीठी-सी कहानी सुना रहा है प्यारा शुभम्!


एक ख़बर अच्छी नहीं है!
लविज़ा की दादी अब उससे मिलने कभी नहीं आ सकेंगी!

Laviza

बाल-दुनिया में एक
ने उसे केला खिलाया!


सरस पायस के साथ दोस्त बनकर खेलने पहुँची सरस्वती जी!


जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से



सरस्वती जी, सरस्वती जी!
हमसे मिलने आओ ना!

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से,
ऐसा प्यार लुटाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

रावेंद्रकुमार रवि

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गुरुवार, अगस्त 19, 2010

इस पर मन बलिहारी है : डॉ. बलजीत सिंह की एक बालकविता

इस पर मन बलिहारी है

Waterfall

पर्वत से जो है उगता, उठता, गिरता है चलता।
इसमें अति उत्साह भरा, रूप बहुत निखरा-निखरा।

यह पत्थर से टकराता, हर बाधा को ठुकराता।
गति है इसमें वीरों की, चमक-दमक है हीरों की।

झर-झर झरना झरता है, कल-कल स्वर कर बहता है।
इसकी ध्वनि अति प्यारी है, इस पर मन बलिहारी है।

डॉ. बलजीत सिंह के संग्रह
गाओ गीत, सुनाओ गीत से साभार
(चित्र : A Broken World से साभार)
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मंगलवार, अगस्त 17, 2010

अक्षिता "पाखी" द्वारा बनाए गए कुछ नए-नवेले चित्र

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अंतरजाल पर स्थित चिट्ठाजगत में फुदकनेवाली
सबसे प्यारी चिड़िया अक्षिता "पाखी" को
कौन नहीं जानता?
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उसने "सरस पायस" के लिए
अपने द्वारा बनाए गए कुछ अनोखे चित्र भेजे थे!

बहुत कोशिश करने पर भी
इस बार मैं उसके चित्रों पर कोई गीत नहीं रच पाया!


वैसे भी उसके चित्रों में एक नहीं, दो नहीं,
कई-कई कविताएँ छुपी होती हैं!


आवश्यकता है, तो एक ऐसी नज़र की,
जो उसके चित्रों में इन कविताओं की पंक्तियाँ खोज सके!


देखिए, आप भी देखिए, पाखी द्वारा बनाए गए
ये चित्र, जिनमें एक अनोखी मौलिकता नज़र आती है!


हो सकता है, आपको ही मिल जाएँ
इन चित्रों में छुपी गुनगुन करती कविताएँ या सुरीले गीत!

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पाखी का बनाया एक यह चित्र भी देख लेते हैं,
जो बहुत ख़ास है, क्योंकि इसे बनाकर उसने उपहार में दिया था,
अपने पापा को, उनके जन्म-दिन पर!
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रविवार, अगस्त 15, 2010

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से : रावेंद्रकुमार रवि का शिशुगीत

आज मैं अपने विद्यालय में
स्वतंत्रता-दिवस पर आयोजित समारोह देखने पहुँची
इस नन्ही दोस्त के फ़ोटो खींचता रहा!




इसके बाद जब कार्यक्रम शुरू हुआ,
तो मुझे सरस्वती जी मिल गईं!
उनकी मुस्कान पर रीझकर मैं गीत रचने लगा!
- आप भी पढ़िए -

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से


सरस्वती जी, सरस्वती जी!
हमसे मिलने आओ ना!

पास हमारे बैठो कुछ पल,
हमको कुछ सिखलाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

हम हैं नन्हे मित्र तुम्हारे,
हमको गले लगाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

अच्छी है मुस्कान हमारी,
हमें देख मुस्काओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

साथ हमारे खेल-कूदकर,
बातें नई बताओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से,
ऐसा प्यार लुटाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

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और ब्लॉगजगत में मिली जय हिंद करती
रिमझिम की यह मोहक मुस्कान -


♥♥ रावेंद्रकुमार रवि ♥♥

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