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बुधवार, दिसंबर 14, 2011

भौंरे जी : रावेंद्रकुमार रवि का बालगीत


भौंरे जी !



भौंरे जी, मुस्काते जी ! 
कली देख रुक जाते जी ! 
चूस-चासकर मधुरस उसका 
अपने घर को जाते जी !

भौंरे जी, मुस्काते जी !
मधुरिम गीत सुनाते जी !
पंख पसारे फूल-फूल पर
गुन-गुनकर मँडराते जी !

भौंरे जी, मुस्काते जी !
फूलों से बतियाते जी !
चूम-चूम सुंदर मुख उनका
अपना मन हर्षाते जी !

भौंरे जी, मुस्काते जी !
चिड़िया से डर जाते जी !
ढूँढ-ढाँढकर कली अधखिली
झट उसमें छुप जाते जी ! 


रावेंद्रकुमार रवि 

9 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति पर हमारी बधाई ||

terahsatrah.blogspot.com

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत अच्छी लगी कविता ...

घनश्याम मौर्य ने कहा…

सुन्‍दर बाल भ्रमर-गीत लिखा है आपने। पहली बार भौंरे पर बालकविता पढ़ रहा हूँ।

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-729:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता।
चित्र भी बहुत अच्छा लगाया है भँवरे का!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

नीरज कुमार ने आपकी पोस्ट " भौंरे जी : रावेंद्रकुमार रवि का बालगीत " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

बड़ी मजेदार कविता है... बच्चों के मन को जरूर हर्षाएगी...

नीरज कुमार द्वारा सरस पायस के लिए १४ दिसम्बर २०११ ८:१५ अपराह्न को पोस्ट किया गया

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति...

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर बालगीत,...बच्चों को निश्चय ही पसंद
आएगा,....सुंदर पोस्ट के लिए बधाई.........

मेरी नई पोस्ट के लिए काव्यान्जलि मे click करे

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

कालजयी गीतों में शामिल मानता हूँ इस गीत को। साधुवाद आपकी रचनाधर्मिता को!

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