कली देख रुक जाते जी !
चूस-चासकर मधुरस उसका
अपने घर को जाते जी !
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"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।
अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।
8 comments:
सुन्दर प्रस्तुति पर हमारी बधाई ||
terahsatrah.blogspot.com
बहुत अच्छी लगी कविता ...
सुन्दर बाल भ्रमर-गीत लिखा है आपने। पहली बार भौंरे पर बालकविता पढ़ रहा हूँ।
आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-729:चर्चाकार-दिलबाग विर्क
बहुत सुन्दर बाल कविता।
चित्र भी बहुत अच्छा लगाया है भँवरे का!
नीरज कुमार ने आपकी पोस्ट " भौंरे जी : रावेंद्रकुमार रवि का बालगीत " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
बड़ी मजेदार कविता है... बच्चों के मन को जरूर हर्षाएगी...
नीरज कुमार द्वारा सरस पायस के लिए १४ दिसम्बर २०११ ८:१५ अपराह्न को पोस्ट किया गया
बहुत सुंदर प्रस्तुति...
बहुत सुंदर बालगीत,...बच्चों को निश्चय ही पसंद
आएगा,....सुंदर पोस्ट के लिए बधाई.........
मेरी नई पोस्ट के लिए काव्यान्जलि मे click करे
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