सरस पायस
तितली बनकर उड़ना है, सबके मन में खिलना है!
Sunday, January 15, 2012
कविता एक सुरीली : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत
Sunday, January 01, 2012
सरस पायस की नई कार : Zen Estilo VXI








Saturday, December 24, 2011
Wednesday, December 14, 2011
भौंरे जी : रावेंद्रकुमार रवि का बालगीत
कली देख रुक जाते जी !
चूस-चासकर मधुरस उसका
अपने घर को जाते जी !
नियमावली : कोई भी भेज सकता है, "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ रचनाएँ!
"सरस पायस" के अनुरूप बनाने के लिए प्रकाशनार्थ स्वीकृत रचनाओं में आवश्यक संपादन किया जा सकता है। रचना का शीर्षक भी बदला जा सकता है। ये परिवर्तन समूह : "आओ, मन का गीत रचें" के माध्यम से भी किए जाते हैं!
प्रकाशित/प्रकाश्य रचना की सूचना अविलंब संबंधित ईमेल पते पर भेज दी जाती है।
मानक वर्तनी का ध्यान रखकर यूनिकोड लिपि (देवनागरी) में टंकित, पूर्णत: मौलिक, स्वसृजित, अप्रकाशित, अप्रसारित, संबंधित फ़ोटो/चित्रयुक्त व अन्यत्र विचाराधीन नहीं रचनाओं को प्रकाशन में प्राथमिकता दी जाती है।
रचनाकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ भेजी गई रचना को प्रकाशन से पूर्व या पश्चात अपने ब्लॉग पर प्रकाशित न करें और अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित न करवाएँ! अन्यथा की स्थिति में रचना का प्रकाशन रोका जा सकता है और प्रकाशित रचना को हटाया जा सकता है!
पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!
"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।
अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।
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- मेघ बजे : बाबा नागार्जुन का एक लोकप्रिय बालगीत
- बहुत मज़े में : वंशिका की रंजना के साथ रवि का शिशु...
- उसको क्यों खा जाते हो? : निरंकारदेव सेवक की शिशुकव...
- चिड़िया रानी नहा रही है : रावेंद्रकुमार रवि का नया...
- नहीं गलेगी तेरी दाल : सुधीर सक्सेना सुधि की बालकवि...
- चकमक में सजी राज कुमारी की दो कविताएँ
- कोई युक्ति सुझाओ : डॉ. नागेश पांडेय संजय की शिशुकव...
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- ऐसी खुशी मिली मुझको : रावेंद्रकुमार रवि की नई बालक...
- देखो, मैं कितना गोरा हूँ : पहेली का हल
- गाजर और टमाटर : मेहुल कपाड़िया की शिशुकविता
- देखो, मैं कितना गोरा हूँ : क्या मुझको पहचाना?
- हरा-भरा रहे अपना जहाँ ...... : सरस चर्चा (३५)
- अपना रूप निखार के : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुग...
- ताज़ पहनवाकर सुंदर-सा लविज़ा को जितवाना है
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(10)
- वंशिका माथुर की मनभावन रंजनाएँ
- वह ख़ुश होकर गाने लगी : सरस चर्चा (३४)
- कमल खिल रहा : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत
- टर्र-टर्र-टूँ-टर-टर-टर : रावेंद्रकुमार रवि का नया ...
- हुआ प्यार से : रावेंद्रकुमार रवि की नई शिशुकविता
- बढ़िया बहुत पसीना : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत...
- मैं अपनी मम्मा से बहुत प्यार करती हूँ : सरस चर्चा ...
- बस थोड़ा-सा पढ़ने दो : डॉ. मोहम्मद अरशद ख़ान का बा...
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- मीठी-मीठी बात : रावेंद्रकुमार रवि की शिशुकविता
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