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शुक्रवार, जनवरी 01, 2010

महके हृदय तुम्हारा : रावेंद्रकुमार रवि की मन महकाती कविता

महके हृदय तुम्हारा

नए वर्ष की
नई सुबह में
फूटी रवि की
नव किरणों-से
चमकें स्वप्न तुम्हारे!
होकर फिर साकार
करें जीवन उजियारा,
ख़ुशियों की सुगंध से
महके हृदय तुम्हारा!

रावेंद्रकुमार रवि

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चारुबेटा,
खटीमा, ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड (भारत) - 262 308.


ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

हार्दिक शुभकामनाऍं। जाकिर अली रजनीश
sushil ने कहा…

kamaal hai! WONDERFULL. NAYE SAAL MAIN..... KHWABON KA AIK AIK DANA AKURAYE HAR PAUDHE PAR JEEVAN GUCHCHHE GUCHCHHE AAYE SURAJ CHAND NADI PAHAD JAISE SABKE HAIN VAISE HI HAR SHAY HAREK KE HISSE AAYE.
Arvind ने कहा…

नए वर्ष की प्रथम भोर इतनी सरस होगी, सोचा न था। "सरस पायस" का प्रवेशांक रुचिकर लगा। यह प्रयास लोकप्रिय हो और प्रगति के पथ पर आगे बढ़े ... जाल पर अपना संजाल बुने ... इन्हीं शुभकामनाओं के साथ - - अरविंद "राज"
डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…
सुख का सूरज उगे गगन में, दु:ख का बादल छँट जाए। हर्ष हिलोरें ले जीवन में, मन की कुंठा मिट जाए। चरैवेति के मूल मंत्र को अपनाओ निज जीवन में - झंझावातों के काँटे पगडंडी पर से हट जाएँ।

PD ने कहा…
are vaah.. badhiya blog banaya hai.. aapak dhanyavaad jo aapne apne blog ka link mujhe mail kiya.. aur han, nav varsh mangal may ho.. :)

KK Yadav ने कहा…

बेहद सुन्दर.मुबारक हो !!
नरेंद्र कुमार ने कहा…

आज मैंने तुम्हारा सरस पायस देख ही लिया। बहुत अच्छे ढंग से व्यवस्थित किया है। रंगों का संयोजन तो और भी अधिक सुंदर है। बधाई!

सहज साहित्य ने कहा…

भाई रावेन्द्र रवि जी नमस्कार ! आपका ब्लॉग देखा । आपने बहुत अच्छा काम किया है । बच्चों की कदम-कदम पर घोर उपेक्षा है । आपका यह कार्य नाम के अनुरूप ही है ।एन बीटी में आपकी पुस्तक मैंने देखी थी ।इस तरह की पुस्तकों की नितान्त आवश्यकता है ।विषय वह कठिन है ,जिसमें बच्चे की रुचि नहीं है॥ रोचक बनाना एक कला है और वह कलाकार है शिक्षक ।मैंने40 वर्ष के शिक्षण और 14-15 साल प्राचार्य के रूप में यही जाना है कि तथाकथित खराब बच्चों को अच्छा बनाया जा सकता है ;यदि प्राचार्य और शिक्षक मिलकर टीम की तरह काम करें । आप डटे रहिए ।एक दिन आप नई ऊँचाई प्राप्त करेंगे । ब्लॉगर में आपका ई मेल सही से नहीं आ रहा है ।प्रतिक्रिया के लिए तो उसी में ऑप्शन है । www.kavitakosh.org तथा www.patang-ki-udan.blogspot.comपर मेरी बाल कविताएँ यूनिकोड में है ।जो आपको लेनी हों वहाँ से भी ले सकते है । पायस का लिंक मैं अपने ब्लॉगर पर भी दे रहा हूँ । आपकी सफलता की कामaन के सा रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' rdkamboj@gmail.com mobile- 09313727493

15 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

इस नये वर्ष में आप हर्षित रहें,
ख्याति-यश में सदा आप चर्चित रहें।
मन के उपवन में महकें सुगन्धित सुमन,
राष्ट्र के यज्ञ में आप अर्पित रहें।।

Udan Tashtari ने कहा…

वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाने का संकल्प लें और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

- यही हिंदी चिट्ठाजगत और हिन्दी की सच्ची सेवा है।-

नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप को ओर आप के परिवार को नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाए

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

आपके और आपके परिवार के लिए नये वर्ष की शुभकामनायें.

Suman ने कहा…

आपको और आपके परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो!

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

रवि जी आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये.
सुख आये जन के जीवन मे यत्न विधायक हो
सब के हित मे बन्धु! वर्ष यह मंगलदयक हो.

(अजीत जोगी की कविता के अंश)

संगीता पुरी ने कहा…

इस नए ब्‍लॉग के साथ नए वर्ष में हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. अच्‍छा लिखते हैं आप .. आपके और आपके परिवार वालों के लिए नववर्ष मंगलमय हो !!

ज्योति सिंह ने कहा…

aapko bhi is sundar rachna ke saath nav varsh ki dhro badhai .

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

संगीता जी,
यह ब्लॉग एक साल का हो चुका है
और आप पहले भी यहाँ आती रही हैं!

नया वर्ष हो सबको शुभ!

जाओ बीते वर्ष

नए वर्ष की नई सुबह में

महके हृदय तुम्हारा!

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..आपको भी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!

Dr. shyam gupta ने कहा…

नव वर्ष मन्गलमय हो.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

नये वर्ष की शुभकामनाओं सहित

आपसे अपेक्षा है कि आप हिन्दी के प्रति अपना मोह नहीं त्यागेंगे और ब्लाग संसार में नित सार्थक लेखन के प्रति सचेत रहेंगे।

अपने ब्लाग लेखन को विस्तार देने के साथ-साथ नये लोगों को भी ब्लाग लेखन के प्रति जागरूक कर हिन्दी सेवा में अपना योगदान दें।

आपका लेखन हम सभी को और सार्थकता प्रदान करे, इसी आशा के साथ

डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

जय-जय बुन्देलखण्ड

ADESH KUMAR PANKAJ ने कहा…

BAHUT HI SUNDER RACHNA KI HAI APNE.
MERI OR SE APKO SPREM -
GUNJIT HO SWAR -SADHNA ,
MILE ALOOKIK GYAN |
DRISTGAT HON - IS VARSH,
MANAV EK SAMAN |

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना।बधाइ\

निर्मला कपिला ने कहा…

आपके और आपके परिवार के लिए नये वर्ष की शुभकामनायें। धन्यवाद

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