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रविवार, दिसंबर 27, 2009

मेरा विस्तृत परिचय : रावेंद्रकुमार रवि

परिचय - रावेंद्रकुमार रवि

नाम -
रावेंद्रकुमार रवि

जन्म -
02.05.1966 (बरेली)

शैक्षिक योग्यताएँ -
1. एम.एस-सी. (गणित), रुहेलखंड विश्‍वविद्यालय, बरेली ।
2. एल.टी. (विज्ञान), राजकीय रचनात्मक प्रशिक्षण महाविद्यालय, लखनऊ ।
3. हिंदी में सृजनात्मक लेखन में डिप्लोमा, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्‍वविद्यालय, नई दिल्ली (सर्वोच्च स्थान, राष्ट्रपति द्वारा विश्‍वविद्यालय स्वर्ण पदक से विभूषित) ।

सृजन-विधाएँ -
बालकथा, बालकविता, लघुकथा, नवगीत, समीक्षा ।

प्रकाशन -
1983 से निरंतर लेखन एवं सभी विधाओं में रचनाओं का प्रकाशन । पहली बालकहानी नंदन में और पहली बालकविता अमर उजाला में प्रकाशित । यूनिसेफ और एकलव्य द्वारा एक-एक चित्रकथा-पुस्तक, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा सृजनात्मक शिक्षा के अंतर्गत गणित की गतिविधि-पुस्तक "वृत्तों की दुनिया" और सौ से अधिक जानी-पहचानी पत्रिकाओं, कुछ संकलनों व पत्रों के साहित्यिक परिशिष्टों में साढ़े तीन सौ से अधिक रचनाएँ प्रकाशित । एक-एक कहानी का राजस्थानी, सिंधी व अँगरेज़ी में अनुवाद । कुछ अंतरजाल पत्रिकाओं पर भी रचनाएँ प्रकाशित ।

रुचियाँ -
साहित्य-सर्जन, छायांकन, बाग़वानी, पर्यटन ।

संप्रति -
शिक्षक (विज्ञान/गणित), कंप्यूटर मास्टर ट्रेनर (इंटेल) ।

पत्र-संपर्क -
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चारुबेटा, खटीमा,
ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड, भारत - 262 308.

स्थायी पता -
कमल-कुंज, बड़ी बिसरात रोड, हुसैनपुरा, शाहजहाँपुर (उ.प्र.) - 242 001.

चलभाष -
+919897614866.

ई-मेल पता -
Raavendra.Ravi@gmail.com

संपादन -
अंतरजाल-पत्रिकाएँ :
प्रकाशित पुस्तकें -
1. यूनीसेफ, लखनऊ द्वारा 2002 में प्रकाशित चित्रकथा-पुस्तक "चकमा"।
2. एकलव्य, भोपाल द्वारा 2003 में प्रकाशित चित्रकथा-पुस्तक "नन्हे चूज़े की दोस्त .. .."।
3. नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा 2008 में सृजनात्मक शिक्षा के अंतर्गत प्रकाशित गणित की गतिविधि-पुस्तक "वृत्तों की दुनिया"।

अनूदित रचनाएँ -
1. बालकहानी "नन्हे चूज़े की दोस्त .. .. " का श्री ताऊ शेखावाटी द्वारा राजस्थानी में ।
2. बालकहानी "नन्हे चूज़े की दोस्त .. .. " का श्री हूँदराज बलवाणी द्वारा सिंधी में ।
3. चित्रकथा "नन्हे चूज़े की दोस्त .. .. " का श्री ................ द्वारा उर्दू में ।
4. बालकहानी "जैसे को तैसा" का स्वयं अँगरेज़ी में ।

पुरस्कार (साहित्य) -
स्वर्ण पदक विजेता, हिंदी में सृजनात्मक लेखन में डिप्लोमा, इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्त विश्‍वविद्यालय, 2005 (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति, भारत द्वारा स्वर्ण पदक से विभूषित)


पुरस्कार (शिक्षा) -
1. टीचर ऑफ द इयर-2004, उत्तरांचल टेक्नोलॉजी अवार्ड, विकासखंड विजेता, खटीमा (ऊधमसिंहनगर)
2. टीचर ऑफ द इयर-2003, उत्तरांचल टेक्नोलॉजी अवार्ड, मंडल विजेता, कुमाऊँ (उत्तरांचल)

राष्ट्रीय स्तर पर कार्यशाला/संगोष्ठी में प्रतिभाग -

लगभग दो दर्जन, जिनमें से प्रमुख हैं -

1. यूनिसेफ, लखनऊ / नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली / नालंदा, लखनऊ द्वारा आयोजित लेखन कार्यशाला, 2002 (एक चित्रकथा-पुस्तक "चकमा" का चयन व यूनिसेफ, लखनऊ द्वारा प्रकाशित)

2. केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा आयोजित "विविध भारतीय भाषाओं का बालसाहित्य" विषय पर सेमिनार व कवि सम्मेलन, 2003 ( कुमाउँनी व गढ़वाली बालसाहित्य पर आलेख-वाचन व कवि सम्मेलन में बालकविताओं का पाठ)

3. नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली / नालंदा, लखनऊ द्वारा आयोजित गणित-लेखन कार्यशाला 2004 (एक पुस्तक "वृत्तों की दुनिया" का चयन व नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नई दिल्ली द्वारा 2008 में प्रकाशित)

4. सर्व शिक्षा अभियान, चमोली (उत्तरांचल) के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय बालसाहित्य लेखन कार्यशाला, जनवरी 2006 (कार्यशाला में तैयार कुछ कहानियाँ व कविताएँ प्रकाशित)

5. नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नई दिल्ली द्वारा देहरादून में पुस्तक मेला के अंतर्गत आयोजित बालसाहित्य संगोष्ठी, जून 2006 (संगोष्ठी का संयोजन, विषय - "समकालीन भारतीय बालसाहित्य के परिदृश्य में उत्तरांचल के बालसाहित्य : स्थिति, समस्या एवं संभावनाएँ" पर आलेख का वाचन और कवि सम्मेलन में कविताओं का पाठ)

6. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या - 2005 के आलोक में पाठ्यक्रम विकास कार्यशाला, एस.सी.ई.आर.टी., उत्तरांचल, नरेंद्रनगर, जुलाई 2006 (कक्षा - एक से पाँच तक के गणित के पाठ्यक्रम के निर्माण में सहयोग)

7. सांस्कृतिक स्रोत व प्रशिक्षण केंद्र, नई दिल्ली द्वारा "प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में स्कूलों की भूमिका" पर कार्यशाला, सितंबर 2006 (मुख्य समारोह व उत्तरांचल की सांस्कृतिक प्रस्तुति का संचालन और "युवाशक्ति का पलायन : पहाड़ से मैदान की ओर" विषय पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत)

8. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या - 2005 के आलोक में पुस्तक लेखन कार्यशाला, एस.सी.ई.आर.टी., उत्तरांचल, नरेंद्रनगर, ग.मं.वि.नि.ऋषिकेश, सितंबर 06 से दिसंबर 06 (पूर्व कार्यशाला में निर्मित कक्षा - एक से पाच तक के गणित के पाठ्यक्रम पर आधारित पाठ्यपुस्तकों के लेखन में सहयोग)

9. राज्य विज्ञान महोत्सव 2006 में एस.सी.ई.आर.टी., उत्तरांचल की गणित प्रयोगशाला का संचालन, रा.बा.इ.कॉ., पंतनगर, 14 से 17 नवंबर 2006

10. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या - 2005 के आलोक में पुस्तक लेखन कार्यशाला, एस.सी.ई.आर.टी., उत्तराखंड, नरेंद्रनगर (टिहरी गढ़वाल) द्वारा डायट, रुड़की (हरिद्वार) में जून-जुलाई 2009 को आयोजित (कक्षा - चार और पाँच की गणित की पाठ्यपुस्तकों का लेखन)

उन पत्र-पत्रिकाओं की सूची, जिनमें रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं -

हिंदी पत्र-पत्रिकाएँ -
नंदन, पराग, बालभारती, बालहंस, चकमक, बालवाणी, चंपक, धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, मधुमती, इंद्रप्रस्थ भारती, हिमप्रस्थ, सुमन सौरभ, स्नेह, बच्चों का देश, बालमेला, बालवाटिका, उत्तर प्रदेश, समाज-कल्याण, विज्ञान प्रगति, पाठक मंच बुलेटिन (नेशनल बुक ट्रस्ट,इंडिया), देवपुत्र, अनुराग, हसती दुनिया, प्रेरणा अंशु, अछूते संदर्भ, वीणा, अणुव्रत, बालमितान, बच्चे और आप, बालसाहित्य समीक्षा, रत्नलाल शर्मा न्यास की स्मारिका, विद्यामेघ, लोटपोट, लल्लू जगधर, मधु मुस्कान, सरिता, मुक्ता, सरस सलिल, गरिमा भारती, हिमालिनी, प्रगति निर्माण, प्रिय संपादक, सानुबंध, गरिमा भारती, जाह्नवी, नारायणीयम्, लोकगंगा, पंखुड़ी, कुछ कविता व कहानी संकलन, भास्कर (भोपाल), अमर उजाला (बरेली, मेरठ), चौथी दुनिया (दिल्ली), हिंदुस्तान (दिल्ली, लखनऊ), जनसत्ता (दिल्ली), नवभारत टाइम्स (दिल्ली), देशबंधु (रायपुर), जागरण (बरेली, कानपुर), पुनर्नवा-जागरण (कानपुर), राजस्थान पत्रिका (जयपुर), नई दुनिया (इंदौर), पायनियर (लखनऊ), स्वतंत्र भारत (लखनऊ), ट्रिब्यून (चंडीगढ़), अमृत प्रभात (लखनऊ), सहारा समय (लखनऊ), पंजाब केसरी (जालंधर), स्पूतनिक (लखनऊ), आज (वाराणसी), नव सत्यम् (बरेली), एक झलक (शाहजहाँपुर), इत्यादि ।

अँगरेज़ी पत्र-पत्रिकाएँ -
लिटिल जेंट,
नॉर्दर्न इंडिया पत्रिका (लखनऊ),
रीडर्स क्लब बुलेटिन (नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया) ।

हिंदी अंतरजाल पत्रिकाएँ -
सरस पायस, नन्हा मन, हिंदी का शृंगार,
अनुभूति, रचनाकार, सृजनगाथा।

सिंधी पत्रिका -
बाग़ बहार।







रावेंद्रकुमार रवि,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चारुबेटा,
खटीमा, ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड (भारत) - 262 308.



2 comments:



डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…


कामना है कि बुलन्दियों पर पहुँचो। आगे बढ़ते रहो, पथ प्रशस्त है।


shikha varshney ने कहा…


आपसे मिलकर हार्दिक प्रसन्नता हुई.मेरा बचपन भी पिथोरागढ़ की वादियों में बीता है.आपके प्रशस्त जीवन के लिए समस्त शुभकामनाये

18 टिप्‍पणियां:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह जी पढ़ा आपके बारे में..बल्ले बल्ले

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छा लगा विस्तृत परिचय जानकर.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लगा.यह सब जान कर.
धन्यवाद

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत अच्छा लगा आपके बारे मे जान कर धन्यवाद और शुभकामनायें

अनुनाद सिंह ने कहा…

गुरुदेव, आपका परिचय पाकर धन्य हुआ। हिन्दी चिट्ठाकारी में सुयोग्य लोग पदार्पण कर रहे हैं, इससे खुशी और क्या हो सकती है?

आपकी योग्यताओं एवं क्षमताओं को दृष्टिगत रखते हुए आपसे हिन्दी विकिपिडिया में अच्छे लेखों के योगदान का निवेदन करता हूँ। कुछ लोग यहाँ लिख रहे हैं और बहुतों के शामिल होने की जरूरत है।

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

आदरणीय आचार्यजी द्वारा मेल से दिया गया आशीष -

"रविवत भास्वर हो सदा,
जग को मिले उजास.
'सलिल' अनवरत अथक हो,
प्रियवर सतत प्रयास. ."
acharya sanjiv 'salil'
divyanarmada.blogspot.com

ज्योति सिंह ने कहा…

aapke is jeevan parichaye se kafi prabhit hui ,hamari badhiyaan sweekaare ,

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

अच्छा लगा फिर फिर आपको जानना।
--------
लखनऊ बना मंसूरी, क्या हैं दो पैग जरूरी?
2009 के ब्लागर्स सम्मान हेतु ऑनलाइन नामांकन चालू है।

Priya ने कहा…

ब्लॉग्गिंग की दुनिया में आप जैसे लोग भी बस यूँ ही मिल जायेगे .......ऐसा भी नहीं सोचा था कभी.....आपके बारे में जानकर अच्छा लगा .

Tej Pratap Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर

jenny shabnam ने कहा…

रावेन्द्र जी,
मेरे ब्लॉग पर आप आये बहुत आभार! आपका विस्तृत और प्रभावशाली परिचय जानकार अति प्रसन्नता हुई| हिंदी साहित्य के क्षेत्र में आपको और भी उपलब्धियां हासिल हो मेरी शुभकामना है|

shivashila ने कहा…

कामना है - आप बुलंदियों के आसमान पर विचरण करें.

shivashila ने कहा…

कामना है - आप बुलंदियों के आसमान में विचरण करें.

HINDU TIGERS ने कहा…

वाह क्या बात है

KAHI UNKAHI ने कहा…

आपके बारे में विस्तार से जान कर बहुत अच्छा लगा...शुभकामनाएं ।

सीमा सचदेव ने कहा…

aapke baare me jaankar bahut achchaa lagaa
सो स्वीट लविज़ा मिलो अपने नए दोस्त शुभम से यहां
http://www.shubhamsachdeva.blogspot.com/

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

रावेन्द्र जी, बाल साहित्य में ढेर सारी उपलब्धियां ....भई वाह ! गजब...मेरी ओर हार्दिक बधाई. और
शुभकामनाएं..

प्रियदर्शिनी तिवारी ने कहा…

आपके बारे मै इतनी सारी जानकारी मिली ,खुशी हुई..

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