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बुधवार, जुलाई 21, 2010

सुन, ओ सरस! सुन ... : अरविंद राज का नया बालगीत

सुन, ओ सरस! सुन ... 

IMG_0136

झरनों का शोर और
झींगुर की झुन,
साँझ का सलोना-सा
गीत रहे बुन!

सुन, ओ सरस! सुन ... 


पर्वत के माथे को
बादल सहलाते हैं,
बादल की शाल तले
चाँद जी सुहाते हैं!

चंदनिया छेड़ रही
लोरी की धुन!

सुन, ओ सरस! सुन ... 

थोड़ी ही देरी में
तारे भी आएँगे,
अंबर के आँगन में
चाँदी बिखराएँगे!

निंदिया के गाँव चल
सपने लें चुन!

सुन, ओ सरस! सुन ... 















अरविंद राज (सरस पायस के चाचा)

(चित्र में : पल्लवी, दीप्ति, कुसुम और संगीता के साथ 
डेढ़ साल का "सरस पायस" : 1997 में लिया गया चित्र)

8 टिप्‍पणियां:

Akshita (Pakhi) ने कहा…

सुन्दर सा बाल गीत और प्यारे-प्यारे चित्र.

_____________________
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Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत!!

रंजन ने कहा…

बहुत प्यारा गीत.. और सरस तो है की अच्छा..


प्यार...

KK Yadava ने कहा…

मन प्रसन्न हो गया यह गीत पढ़कर...बधाई.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर गीत जी. धन्यवाद

JHAROKHA ने कहा…

bahut hi man ko bhaya yah aapka sundar sa ,pyara sa balgeet.
poonam

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल गीत....चित्र भी बहुत खूबसूरत है

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

झरोखा (JHAROKHA) की टिप्पणी को लिप्यांतरण -

बहुत ही मन को भाया यह आपका सुंदर सा,
bahut hi man ko bhaya yah aapka sundar sa,

प्यारा सा बालगीत।
pyara sa balgeet.

पूनम
poonam

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