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गुरुवार, जुलाई 01, 2010

हुआ सवेरा ... ... . : सलोनी राजपूत का नया शिशुगीत

हुआ सवेरा ... ... .

हुआ सवेरा चिड़िया चहकी,
फूल खिल उठे, बगिया महकी!

झूला झूल रहा है बंदर,
चूहा खाए लाल चुकंदर!
फोड़ रही अखरोट गिलहरी,
आसमान में लाली ठहरी!
हवा चली कुछ बहकी-बहकी,
हुआ सवेरा ... ... .

पूँछ हिलाता गिरगिट आया,
मेढक ने तब उसे चिढ़ाया!
आई तितली पंख पसारे,
देखें उसको टिड्डे सारे!
इन्हें देखकर कोयल कुहकी,
हुआ सवेरा ... ... .


सलोनी राजपूत

15 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

सुबह की चिडिया की चहक जैसी सुन्दर कविता है। बधाई

शारदा अरोरा ने कहा…

वाह वाह , मज़ा आ गया , सुन्दर बालगीत

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर बालगीत है!
--
बड़ी होकर सलोनी राजपूत एक महान साहित्यकार बनेंगी!

girish pankaj ने कहा…

saloni ka salona geet parh kar mazaa aa gaya..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर शिशुगीत,....सलोनी को बहुत सी शुभकामनायें

राजकुमार सोनी ने कहा…

बहुत ही प्यारी कविता लगी।

माधव ने कहा…

sundar kavitaa

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट!
--
आपकी चर्चा तो यहाँ भी है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/07/203.html

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

सलोनी कहती उठ जाओ अब
तो कैसे हम सो पाएंगे..
इत्ता अच्छा गीत लिखे वो
कैसे कतरा के निकल जायेंगे.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

गिरीश पंकज (girish pankaj) जी की टिप्पणी का लिप्यांतरण --

सलोनी का सलोना गीत पढ़कर मज़ा आ गया ..
saloni ka salona geet parh kar mazaa aa gaya..

sidheshwer ने कहा…

अच्छा लिखा सलोनी ! शुभम!
याद रहे गद्य को कवियों का निकष कहा गया है, सो कुछ गद्य भी लिखो!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

सलोनी जी की कहानी भी प्राप्त हो चुकी है!
शीघ्र ही उसे भी "सरस पायस" पर प्रकाशित किया जाएगा!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

एक और शुभ सूचना --

सलोनी जी का यह गीत जल्दी ही एक बहुत बढ़िया
रंग-रँगीली पत्रिका में भी प्रकाशित होनेवाला है!
--
सलोनी जी को बहुत-बहुत बधाई!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

सलोनी राजपूत का यह शिशुगीत
चकमक के अगस्त 2010 के अंक में प्रकाशित किया गया है!
--
आप भी देखिए - "हुआ सवेरा"

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