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सोमवार, जुलाई 12, 2010

सूरज आया : विश्वबंधु की चित्रकारी उनके नए शिशुगीत के साथ

सूरज आया

सूरज आया, सूरज आया।

वह तो सबके मन को भाया।
सूरज आया, सूरज आया।

अपनी धूप साथ में लाया।
सूरज आया, सूरज आया।

खूब पसीना सबको आया।
सूरज आया, सूरज आया।

सबने उसको शीश झुकाया।
सूरज आया, सूरज आया।


- चित्र और गीत : विश्वबंधु -

8 टिप्‍पणियां:

रंजन ने कहा…

bahut pyara..

विश्वबंधु को बधाई..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर चित्रगीत!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर गीत ..साथ में चित्र भी खूबसूरत है

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा.

बाल-दुनिया ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत और मनभावन चित्र भी..बधाई.

_________________________
अब ''बाल-दुनिया'' पर भी बच्चों की बातें, बच्चों के बनाये चित्र और रचनाएँ, उनके ब्लॉगों की बातें , बाल-मन को सहेजती बड़ों की रचनाएँ और भी बहुत कुछ....आपका स्वागत है.

माधव ने कहा…

very good poem

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

माधव जी की टिप्पणी का लिप्यांतरण -

बहुत अच्छी कविता
very good poem

डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी ने कहा…

RAVI JI KE PRAYAS SE VISHWA BANDHU KO PRERNA MILI HAI..RAVI JI KO BADHAI...

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