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गुरुवार, दिसंबर 30, 2010

पापा, कैसे करूँ पढ़ाई : डॉ. बलजीत सिंह की बालकविता

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पापा, कैसे करूँ पढ़ाई?
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सूर्य निकलने से पहले ही मम्मी मुझे जगातीं।
मल-मलकर पूरे शरीर को भली-भाँति नहलातीं।
रगड़-रगड़ मेरे शरीर को, उसमें गरमी लातीं।
जब बालों में कंघी करतीं, धीरे-धीरे गातीं।
सुबह-सुबह वह मुझे खिलातीं रोज़ पराँठा ढाई।
पापा, कैसे करूँ पढ़ाई?


दादाजी जब देखो मुझ पर हुक्म चलाते रहते।
छोटू को "शू-शू" करवाने को मुझसे सब कहते।
घंटी बजने पर सब कहते, "देख, कौन आया है?"
सच कहता हूँ, बहुत नाक में मेरी दम आया है।
जूते-चप्पल मुझसे ही ढुँढवातीं चाची-ताई।
पापा, कैसे करूँ पढ़ाई?

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डॉ. बलजीत सिंह
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सोमवार, दिसंबर 20, 2010

हम बगिया के फूल : डॉ. बलजीत सिंह का बालकविता-संकलन

जानेमाने प्रकाशक डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल की देखरेख में


giriraj@hindisahityaniketan.com

द्वारा डॉ. बलजीत सिंह की 
६६ कविताओं का एक संकलन छापा गया है!
इस संकलन की कविताएँ बच्चों में
राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति, गौरव, स्वाभिमान, 
आदर्श एवं नैतिक गुणों के
भाव जगाने के उद्देश्य से रची गई हैं!

बड़े आकार के १२८ बढ़िया पृष्ठों पर 
सचित्र प्रकाशित की गई
इस पुस्तक का मूल्य मात्र एक सौ पचास रुपए है!
इसे मँगाने के लिए उपरोक्त पतों पर संपर्क कीजिए!
सुंदर आवरण मुकेश नादान ने तैयार किया है!


इस संकलन में प्रकाशित
डॉ. बलजीत सिंह की एक कविता का अंश
"सरस पायस" के साथियों के लिए
३०.१२.१० को विशेष रूप से प्रकाशित किया जाएगा!
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रावेंद्रकुमार रवि 
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