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मंगलवार, जून 29, 2010

बरखा रानी, आओ ना : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत

बरखा रानी, आओ ना!
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झूम-झामकर, धूमधाम से
हमको गले लगाओ ना!
बरखा रानी, आओ ना!


परेशान होकर गरमी से
भूल गईं जो मीठी बतियाँ,
उन चिड़ियाओं की बोली में
कुछ मिठास भरवाओ ना!
बरखा रानी, आओ ना!


बादल की गड़-गड़ के पीछें
छुपा रखी थी जो स्वरलहरी,
पत्तों पर गिर-गिरकर हमको
फिर से वही सुनाओ ना!
बरखा रानी, आओ ना!


बुनती रहीं आज तक जो तुम
इंद्रधनुष के रंगोंवाला,
बूँदों का तुम वही बिछौना
धरती पर बिछवाओ ना!
बरखा रानी, आओ ना!
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रावेंद्रकुमार रवि

11 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुतशू ंदर बाल गीत जी धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर बालगीत....

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत अच्छी लगी आपकी यह रचना..अब तो बारिश को आ ही जाना चाहिए.

___________________________
'पाखी की दुनिया' में स्कूल आज से खुल गए...आप भी देखिये मेरा पहला दिन.

KK Yadava ने कहा…

बहुत प्यारी बाल कविता..बधाई.

निर्मला कपिला ने कहा…

सुन्दर बाल गीत । हम भी बरखा रानी का इन्तजार कर रहे हैं। बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढ़िया बाल-गीत के लिए शुभकामनाएँ!

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

भाई रवि,दो बातों के लिये---एक,बारिश की बौछारों की तरह कविताएं रचे जारहे हो ।और दो ,उनमें कल्पनाओं के इन्द्रधनुष भी नजर आरहे हैं --मुझे बार-बार प्रशंसा करनी होगी । यूँ ही लिखते रहो ।
गिरिजा कुलश्रेष्ठ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आज आपका सक्रियता क्रमांक 81 है!

jayshankar chaubey ने कहा…

बहुत हीं अच्छी कविता लगी |
बरखा रानी आ जाओ ना ...

jayshankar chaubey ने कहा…

बहुत हीं सुन्दर बाल गीत .

jayshankar chaubey ने कहा…

बहुत हीं अच्छी कविता लगी |
बरखा रानी आ जाओ ना ...

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