"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

शुक्रवार, जून 11, 2010

सूरज बन मुस्काऊँ : अक्षिता पाखी के चित्रों के साथ रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत


सूरज बन मुस्काऊँ

मैंने चित्र बनाए सुंदर,
आओ, तुम्हें दिखाऊँ!
इन्हें बनाकर ख़ुश होता है,
मेरा मन, मैं गाऊँ!

तोता लटका है बादल से,
देखे सूरज नीला!
खरबूजा भी लुढ़क रहा है,
आसमान में पीला!
चूहा, हाथी, फूल हँस रहे,
मैं भी सबको भाऊँ!
मैंने चित्र बनाए ... ... .

गुड्डा मेरा हँसे जा रहा,
चिड़िया गीत सुनाए!
मस्त हवा में पेड़ झूमता,
जोकर नाच दिखाए!
दूर पहाड़ी के पीछे से,
सूरज बन मुस्काऊँ
मैंने चित्र बनाए ... ... .

----------------------------------------------------------------------------------
चित्रकार : अक्षिता पाखी, कवि : रावेंद्रकुमार रवि
----------------------------------------------------------------------------------
----------------------------------------------------------------------------------
चित्रकार : अक्षिता पाखी, कवि : रावेंद्रकुमार रवि
----------------------------------------------------------------------------------

30 टिप्‍पणियां:

adwet ने कहा…

ati sundar.

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

वाह, यह कित्ता प्यारा लग रहा है...रवि अंकल की प्यारी सी कविता और मेरे सुन्दर-सुन्दर चित्र !!

देव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर.... वाह वाह.
भाई शब्द कम पड रहे हैं इस पोस्ट पर टिपण्णी देनें के लिए.

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

इसे हमने 'पाखी की दुनिया' पर भी साभार दिया है.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति... .....आभार

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत प्यारी रचना!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर चित्र और उतना ही प्यारा शिशुगीत....दोनों का साथ बहुत अच्छा लगा...

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता--- बधाई

माधव ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

इस पोस्ट को आज ही
"पाखी की दुनिया" पर भी प्रकाशित कर दिया गया!
वहाँ की गई कुछ टिप्पणियाँ यहाँ भी प्रस्तुत की जा रही हैं -

--
Udan Tashtari ने कहा…
बहुत पसंद आई...अभी अभी न उनके ब्लॉग पर भी पढ़ी..फिर यहाँ छपी तो फिर से पूरी पढ़ी. :)
11 June, 2010
--
विनोद कुमार पांडेय ने कहा…
चित्र भी अच्छी लगी और कविता भी...बहुत सुंदर
11 June, 2010
--
नीरज जाट जी ने कहा…
बहुत सुन्दर।
11 June, 2010
--
माधव ने कहा…
बहुत सुंदर प्रस्तुति
11 June, 2010

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

"पाखी की दुनिया" पर इस पोस्ट के साथ
प्रकाशित की गईं कुछ टिप्पणियाँ -

--
mrityunjay kumar rai ने कहा…
atta girl
11 June, 2010
--
anjana ने कहा…
ब‌हुत सुन्दर कविता और चित्र भी सुन्दर :-)
11 June, 2010
--
डॉ टी एस दराल ने कहा…
ये जुगलबंदी देखकर तो मज़ा आ गया ।
बहुत बढ़िया ।
11 June, 2010
--
आशीष/ ASHISH ने कहा…
ALE WAH!
CHHO CHHWEET... :)
11 June, 2010

M VERMA ने कहा…

चित्र इतने खूबसूरत बना लेती हो और मुझे पता भी नहीं. तुम्हारा होमवर्क ये है कि (क्या करूँ टीचर हूँ न) कि तुम यूँ ही चित्र बनाती रहो.

आशीर्वाद

JHAROKHA ने कहा…

अपके गीत और अक्षिता के चित्रों की खूबसूरत जुगलबन्दी। आप दोनों को बधाई।

आदेश कुमार पंकज ने कहा…

बहुत सुंदर शिशु गीत
बहुत - बहुत बधाई
http;//nanheydeep.blogspot.com/

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर !!!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

आप सबने पाखी के चित्रों के साथ-साथ
मेरे शिशुगीत को भी पसंद किया!
--
इसके लिए मैं आप सबका हृदय से आभारी हूँ!
--
इस समय चिट्ठाजगत पर
"सरस पायस" का सक्रियता क्रमांक 83 है!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुंदर चित्र और अनुपम रचना .... दोनो लाजवाब ...

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

देखा आप सभी लोगों को कित्ते पसंद आये मेरे ये चित्र और उसके साथ रवि अंकल की कविता...मुझे तो पहले से ही पता था. ..आप सभी का आशीष व स्नेह यूँ ही बना रहे.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से साभार -
--
संजय भास्कर ने कहा…
चित्र भी अच्छी लगी और कविता भी...बहुत सुंदर
12 June, 2010
--
Rashmi Singh ने कहा…
अदभुत संयोजन...पाखी के सुन्दर चित्रों के साथ रवि जी कि खूबसूरत अभिव्यक्तियाँ...बधाई.
14 June, 2010
--
Bhanwar Singh ने कहा…
पाखी के जलवे...चारों तरफ पाखी की ही छटा...शुभकामनायें. कभी समीर जी पाखी के लिए कविता लिखते हैं तो रवि जी पाखी की पेंटिंग पर कविता लिखते हैं ...बहुत खूब.
14 June, 2010

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

वाह, मान गए पाखी की चित्रकारी और रावेन्द्र जी की गीत गढ़ने की कला को...हार्दिक शुभकामनायें !!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से साभार -
--
Bhanwar Singh ने कहा…
गुड्डा मेरा हँसे जा रहा,
चिड़िया गीत सुनाए!
मस्त हवा में पेड़ झूमता,
जोकर नाच दिखाए!
दूर पहाड़ी के पीछे से,
सूरज बन मुस्काऊँ

..यह पढ़कर तो मैं भी मुस्काऊँ !
14 June, 2010
--
Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…
अले कित्ते प्याले-प्याले चित्र बनाये प्याली पाखी ने और रवि अंकल ने भी तो बढ़िया सी कविता लिखी...कमाल की जोड़ी.
14 June, 2010
--
अक्षिता (पाखी) ने कहा…
देखा आप सभी लोगों को कित्ती पसंद आई ये चित्र और उसके साथ रवि अंकल की कविता...मुझे तो पहले से ही पता था. ..आप सभी का आशीष व स्नेह यूँ ही बना रहे.
14 June, 2010

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

एक शुभसूचना -
यह पोस्ट प्रिंट मीडिया में भी धूम मचानेवाली है!

सरस पायस : Saras Paayas ने कहा…

मुझे पता है कि कौन सी पत्रिका में
ये चित्र और गीत प्रकाशित होने वाले हैं,
पर अभी नहीं बताऊँगा।
सरप्राइज़ देना है न!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से कुछ और प्रतिक्रियाएँ -
--
Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…
वाह, इस विलक्षण संयोजन के क्या कहने. पाखी को अपने स्नेह में बांधने के लिए हर कोई लालायित है.
14 June, 2010
--
Akanksha~आकांक्षा ने कहा…
वाह, मान गए पाखी की चित्रकारी और रावेन्द्र जी की गीत गढ़ने की कला को...हार्दिक शुभकामनायें !!
14 June, 2010
--
Ratnesh Kr. Maurya ने कहा…
@ रवि जी,

बधाई हो आपको व पाखी जी को...हमें भी इंतजार रहेगा इस धूम का..अडवांस में बधाई.
14 June, 2010

KK Yadava ने कहा…

क्या खूब चित्र हैं बिटिया पाखी के...रवि जी ने तो इन्हें शब्द भी दे दिए. पाखी को प्यार और रवि जी को शुभकामनायें जो उनकी रचनात्मकता इतने रंग लाई.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से --
--
Shyama ने कहा…
@ सरस पायस,
अरे भाई हमें भी बताइयेगा, ताकि हम भी उसका लुत्फ़ उठा सकें.
14 June, 2010
--
Amit Kumar ने कहा…
तोता लटका है बादल से,
देखे सूरज नीला!
खरबूजा भी लुढ़क रहा है,
आसमान में पीला!

....हा..हा..हा..मजेदार. यह संयोजन और जोड़ी तो हमें बहुत भाई. ढेरों बधाइयाँ.
14 June, 2010
--
Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…
अरे पाखी, चंदा बनकर मुस्काने की बात तो सुनी थी पर सूरज बनकर मुस्काना पहली बार सुनी....तभी तो कहते हैं जहाँ ना पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि.
14 June, 2010
--
SR Bharti ने कहा…
पाखी की हर बात निराली है. तभी तो रवि अंकल ने पाखी के चित्रों को लेकर इतनी प्यारी सी रचना रच डाली..दोनों को बधाई.
14 June, 2010

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से --
--
Shyama ने कहा…
पाखी की प्यारी मुस्कान ने सूरज (रवि) को भी मुस्काने पर मजबूर कर दिया...खूबसूरत.
14 June, 2010
--
KK Yadava ने कहा…
क्या खूब चित्र हैं बिटिया पाखी के...रवि जी ने तो इन्हें शब्द भी दे दिए. पाखी को प्यार और रवि जी को शुभकामनायें जो उनकी रचनात्मकता इतने रंग लाई.
14 June, 2010
--
KK Yadava ने कहा…
रवि जी,
प्रकाशन की सूचना हमें भी दीजियेगा..आभार.
14 June, 2010
--
रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…
अवश्य यादव जी,
सूचना क्या, रंग-रँगीली पत्रिका ही
आपके पास पहुँच जाएगी!
14 June, 2010

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से --
--
ersymops ने कहा…
अजी, इतनी सुन्दर कविता और चित्र देखकर भला किसके मुँह से न निकले कि 'वाह-वाह' .
17 June, 2010
--
शरद कुमार ने कहा…
अनुपम...इसे देखकर हम भी मुस्कुराने को मजबूर हो गए.
17 June, 2010
--
raghav ने कहा…
खुबसूरत चित्रण और शिशु-गीत ने तो इसे और भी खूबसूरती दे दी.
17 June, 2010
--
Shyama ने कहा…
यह शिशु गीत तो बहुत प्यारा लगा ..अब मैं इसे गुनगुना रहा हूँ.
17 June, 2010
--
Shyama ने कहा…
..और हाँ, पाखी के हाथों के हुनर को नजर न लगे. ममा से कहकर काला धागा बँधवा लेना.
17 June, 2010

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

पाखी की दुनिया से --

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

गुड्डा मेरा हँसे जा रहा,
चिड़िया गीत सुनाए!
मस्त हवा में पेड़ झूमता,
जोकर नाच दिखाए!
दूर पहाड़ी के पीछे से,
सूरज बन मुस्काऊँ

बहुत सुन्दर.... वाह-वाह.... वाह-वाह...... बहुत बढ़िया प्रस्तुति के लिए बधाई..... रावेन्द्र जी का गीत और अक्षिता के चित्रों की खूबसूरत जुगलबन्दी। आप दोनों को बधाई.....

19 June, 2010

SPARSH ने कहा…

अद्भुत .... सोचा न था की इन प्यारे चित्रों को इतने अच्छे शब्द मिलेंगे रवि जी को इस गीत की रचना के लिए हार्दिक बधाई

Related Posts with Thumbnails

"सरस पायस" पर प्रकाशित रचनाएँ ई-मेल द्वारा पढ़ने के लिए

नीचे बने आयत में अपना ई-मेल पता भरकर

Subscribe पर क्लिक् कीजिए

प्रेषक : FeedBurner

नियमावली : कोई भी भेज सकता है, "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ रचनाएँ!

"सरस पायस" के अनुरूप बनाने के लिए प्रकाशनार्थ स्वीकृत रचनाओं में आवश्यक संपादन किया जा सकता है। रचना का शीर्षक भी बदला जा सकता है। ये परिवर्तन समूह : "आओ, मन का गीत रचें" के माध्यम से भी किए जाते हैं!

प्रकाशित/प्रकाश्य रचना की सूचना अविलंब संबंधित ईमेल पते पर भेज दी जाती है।

मानक वर्तनी का ध्यान रखकर यूनिकोड लिपि (देवनागरी) में टंकित, पूर्णत: मौलिक, स्वसृजित, अप्रकाशित, अप्रसारित, संबंधित फ़ोटो/चित्रयुक्त व अन्यत्र विचाराधीन नहीं रचनाओं को प्रकाशन में प्राथमिकता दी जाती है।

रचनाकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ भेजी गई रचना को प्रकाशन से पूर्व या पश्चात अपने ब्लॉग पर प्रकाशित न करें और अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित न करवाएँ! अन्यथा की स्थिति में रचना का प्रकाशन रोका जा सकता है और प्रकाशित रचना को हटाया जा सकता है!

पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!

"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।

अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।

आवृत्ति