"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

शनिवार, अप्रैल 03, 2010

बोलो, मेरी गुड़िया रानी : संगीता स्वरूप का नया शिशुगीत

बोलो, मेरी गुड़िया रानी!
क्यों करती हो तुम मनमानी?
बोलो, मेरी गुड़िया रानी!

बिस्किट, टॉफी, केक, मिठाई,
बोलो, क्या तुमको मन-भाई?

चीज़ कौन-सी तुमको खानी?
बोलो, मेरी गुड़िया रानी!

शरबत, कोकाकोला लाऊँ,
या फिर जलजीरा बनवाऊँ?
लोगी, क्या तुम नींबू-पानी?
बोलो, मेरी गुड़िया रानी!

जल्दी कुछ खाने को ले लो,
संग साथियों के फिर खेलो!
क्यों गुस्सा होने की ठानी?
बोलो, मेरी गुड़िया रानी!

--------------------------------
संगीता स्वरूप
--------------------------------
( चित्र में हैं : कशिश )

16 टिप्‍पणियां:

ADESH KUMAR PANKAJ ने कहा…

बहुत सुंदर बाल गीत है
कवि को बहुत - बहुत बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

गुड़िया रानी बहुत सयानी,
करती हो कितनी शैतानी!
टॉफी इसको सबसे प्यारी,
छीन झपट खा लेती सारी!!
सुनती ढेरों बाल-कहानी!!
.. ..
संगीता जी का यह बालगीत बहुत प्यारा है!
सरस पायस पर प्रकाशित करने के लिए बधाई!

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

बोलो मेरी गुड़िया रानी....शिशु गीत के तीनों अंतरे गजब...संगीता स्वरूप को हार्दिक बधाई. दीनदयाल शर्मा

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर बाल गीत है, चित्र भी बहुत सुंदर
बिटिया को बहुत बहुत प्यार

संजय भास्कर ने कहा…

अति सुंदर बाल गीत है, चित्र भी बहुत सुंदर

Shekhar kumawat ने कहा…

wow achi rachan he
aap ko badhai
बोलो, मेरी गुड़िया रानी!


shekhar kumawat


http://kavyawani.blogspot.com/

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

जितना सुन्दर गीत उतनी ही सुन्दर बिटिया. बधाई.

Suman ने कहा…

nice

चंदन कुमार झा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर शिशु कविता । संगीता जी को बधाई

sangeeta swarup ने कहा…

बाल गीत को सराहने के लिए सभी पाठकों का शुक्रिया..

शास्त्री जी की पंक्तियाँ बहुत हौसला प्रदान करने वाली हैं

रावेंद्र जी का आभार इस बालगीत को सरस पायस पर स्थान देने के लिए...कशिश गुडिया बहुत प्यारी है..:)

sidheshwer ने कहा…

बहुत बढ़िया !

सीमा सचदेव ने कहा…

मैनें नहीं तुमनें जिद्द ठानी
कहती हो मुझे झूठ कहानी
कहां बिस्किट टाफ़ी औ मिठाई
केक न देता कहीं दिखाई
न शरबत न कोकाकोला
जलजीरा कहां तुमने घोला
नींबु पानी भी न लाई
बातें बडी-बडी सुनाई
सुबह से खाली मेरा पेट
खेलना मेरा कर दिया लेट
अच्छा अब एक चाक्लेट देदो
बस थोडी सी मैगी देदो
चाक्लेट मिल्क भी मुझको भाता
पर तुमको कुछ समझ न आता
जल्दी करो वर्ना रो दूंगी
साथ में लेअस , कुरकुरे लूंगी
झूठा मुझको न ललचाओ
भूख लगी सब जलदी लाओ

बहुत ही प्यारी कविता के लिए बधाई

sangeeta swarup ने कहा…

वाह, सीमा जी आपने तो कमाल ही कर दिया....बहुत सुन्दर ,

माधव ने कहा…

सर आपने चर्चा मंच पर मेरे बारे में लिखा , मुझे बहुत खुशी हुई , आप ने हमारी मुस्कान के बारे में लिखा , मै आपके बारे में कहता हूँ आप की मुस्कान भी ब्लॉग जगत में सबसे अच्छी है . आपका स्नेह मुझे मिलता रहे , इसी आशा से धन्यवाद !

ज्योति सिंह ने कहा…

जल्दी कुछ खाने को ले लो,
संग साथियों के फिर खेलो!
क्यों गुस्सा होने की ठानी?
बोलो, मेरी गुड़िया रानी!
baal hath me adbhut aanand ka vaas hota hai ,aur bholapan bhi ,bachcho ka vishesh hathiyaar hai baat manvane ka .

Ravindra Ravi ने कहा…

बोलो, मेरी गुड़िया रानी! क्यो करती इतनी शैतानी मुझे याद आती है नानी! बहुत सुंदर रचना!

Related Posts with Thumbnails

"सरस पायस" पर प्रकाशित रचनाएँ ई-मेल द्वारा पढ़ने के लिए

नीचे बने आयत में अपना ई-मेल पता भरकर

Subscribe पर क्लिक् कीजिए

प्रेषक : FeedBurner

नियमावली : कोई भी भेज सकता है, "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ रचनाएँ!

"सरस पायस" के अनुरूप बनाने के लिए प्रकाशनार्थ स्वीकृत रचनाओं में आवश्यक संपादन किया जा सकता है। रचना का शीर्षक भी बदला जा सकता है। ये परिवर्तन समूह : "आओ, मन का गीत रचें" के माध्यम से भी किए जाते हैं!

प्रकाशित/प्रकाश्य रचना की सूचना अविलंब संबंधित ईमेल पते पर भेज दी जाती है।

मानक वर्तनी का ध्यान रखकर यूनिकोड लिपि (देवनागरी) में टंकित, पूर्णत: मौलिक, स्वसृजित, अप्रकाशित, अप्रसारित, संबंधित फ़ोटो/चित्रयुक्त व अन्यत्र विचाराधीन नहीं रचनाओं को प्रकाशन में प्राथमिकता दी जाती है।

रचनाकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ भेजी गई रचना को प्रकाशन से पूर्व या पश्चात अपने ब्लॉग पर प्रकाशित न करें और अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित न करवाएँ! अन्यथा की स्थिति में रचना का प्रकाशन रोका जा सकता है और प्रकाशित रचना को हटाया जा सकता है!

पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!

"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।

अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।

आवृत्ति