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शनिवार, अप्रैल 24, 2010

म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती : आकांक्षा यादव की नई शिशु कविता


म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती
दिन-भर टें-टें करता रहता,
राम-नाम भी जपता रहता।

बहुत प्यार से मैंने पाला,
मेरा तोता बहुत निराला।

उसको मिर्ची ख़ूब खिलाती,
पानी लाकर उसे पिलाती।

म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती,
बिल्ली से मैं उसे बचाती।
आकांक्षा यादव

20 टिप्‍पणियां:

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

आकांक्षा यादव जी की शिशु कविता "म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती" बहुत अच्छी लगी...बधाई. मैंने भी यह कविता पढ़ कर एक कविता लिखी है.
.अभी अभी...आपकी कविता की प्रेरणा से ...
हरियल तोता कितना प्यारा,
गोल आँख लगती है तारा,
कुतर कुतर कर मिर्ची खाए,
मुंह जले पानी मंगवाए,
म्याऊँ कह कोई उसे डराता,
पिंजरे में झट से घुस जाता.
-दीनदयाल शर्मा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मिर्ची बहुत चाव से खाता,
लेकर मेरा नाम बुलाता!
इसका रंग बहुत प्यारा है,
अलबेला मिट्ठू न्यारा है!
--
आकांक्षा यादव जी का
शिशुगीत बहुत ही सुन्दर है!
--
सरस पायस के अनुरूप है!
--
बहुत-बहुत बधाई!

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।

माधव ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और प्यारा तोता है

संजय भास्कर ने कहा…

कुछ शीतल सी ताजगी का अहसास करा गई आपकी रचना।

nilesh mathur ने कहा…

sundar kavita !

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जी ,

Udan Tashtari ने कहा…

चावल दाल और अमरुद भी तो दो उसे..बस मिर्ची पानी पर कब तक चलेगा बेचारा. :)


बहुत बढ़िया रचना!

Shri"helping nature" ने कहा…

bachpan yaad aa gyiii

अरविंद राज ने कहा…

बहुत बढ़िया शिशु कविता है। इसे पढ़कर दिल ख़ुश हो गया।

सरस पायस : Saras Paayas ने कहा…

म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती,
बिल्ली से मैं उसे बचाती।

ये पंक्तियाँ मुझे बिल्कुल नई
और प्यारी लगीं!

sangeeta swarup ने कहा…

बहुत प्यारी बाल कविता....बधाई

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

रवि जी, सरस पायस जिस तरह बच्चों के साथ-साथ बड़ों का बचपना भी लौटा रहा है, वह सराहनीय है. मेरे इस शिशु-गीत के प्रकाशन के लिए आभार.

आप सभी के प्रोत्साहनस्वरूप टिप्पणियों के लिए आभार.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

चिट्ठाजगत पर इस समय
"सरस पायस" का सक्रियता क्रमांक 111 है!

Ratnesh ने कहा…

म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती,
बिल्ली से मैं उसे बचाती।
बहुत सुन्दर बाल-गीत लिखा आकांक्षा जी ने..बधाई.

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

आकांक्षा यादव जी का शिशुगीत बहुत ही सुन्दर व मनभावन लगा..बधाई.

Shahroz ने कहा…

मजा आ गया यह शिशु गीत पढ़कर..आकांक्षा जी व सरस पायस को बधाई.

KK Yadava ने कहा…

बहुत प्यारा बाल गीत. मन को भा गया.

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती,
बिल्ली से मैं उसे बचाती।
....म्याऊँ-म्याऊँ...कित्ता प्यारा गीत ..है न. मेरे मन को तो भा गया.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

अगर यह कविता
पाखी के मन को भा गई,
तो समझो -
रचनाकार और सरस पायस
दोनों का श्रम सजीव हो गया!
--
पाखी और माधव को
उनकी मीठी-मीठी टिप्पणियों के लिए
मीठा-मीठा प्यार!
--
अन्य सभी
आदरणीय टिप्पणीकारों का भी आभारी हूँ!
"सरस पायस" पर अपना स्नेह ऐसे ही बरसाते रहें!

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