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मंगलवार, अप्रैल 13, 2010

रंग-रँगीला : कृष्णकुमार यादव की एक बालकविता

रंग-रँगीला
गाल गुलाबी, नाक नुकीली,
लंबी टोपी पहन चिढ़ाए।
उछले-कूदे, चले मटककर,
पहिए पर चढ़ उसे चलाए।
रंग-रँगीला बनकर आए,
सबके मन को ख़ुश कर जाए।
हम सब देख बजाते ताली,
जोकर सबको ख़ूब हँसाए।
झूला झूले चहक-चहककर,
चढ़े सायकिल, तो लहराए।
कितना अच्छा है यह जोकर,
कभी किसी को नहीं रुलाए
कृष्णकुमार यादव
(जोकरों के फ़ोटो : संबंधित वेबसाइटों से साभार)

8 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
जो काम नही कर पायें दूसरे, वो जोकर कर दिखलाये,सरकस मे जोकर ही, दर्शक-गण को बहुत रिझाये।नाक नुकीली, गाल गुलाबी,लम्बी टोपी पहने,उछल-कूद करके ये जोकर,सबको खूब हँसाये।
परमजीत बाली ने कहा…
सुन्दर बालगीत है।बधाई।
संगीता पुरी ने कहा…
रंग रंगीला जोकर ... बहुत सुंदर रचना।
Syed Akbar ने कहा…
सुन्दर बालगीत..........बधाई
amlendu asthana ने कहा…
apka blog pasand aaya. kahta hai jokar sara Zamana adhi hahkikat adha fasana. Krishna kr. ki kavita achchhi hai. Badhai
डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी ने कहा…
रंग रंगीला कविता बहुत सुन्दर है और आकर्षक ढंग से प्रकाशित की गई है ! yadav ji aur ravi ji ko badhai!
अविनाश वाचस्पति ने कहा…
कोई और न कर सकेजोकर कर दिखाएहंसाने का मुश्किल कामसहजता से कर हंसाए।
चंदन कुमार झा ने कहा…
बहुत अच्छी रचनायें.भैया!!! मेरे ब्लाग पर आने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद.कृप्या यूँ हीं मार्गदर्शन करते रहियेगा.

24 टिप्‍पणियां:

sangeeta swarup ने कहा…

रंग रंगीला....बचपन में देखि सर्कस की याद दिला गया...बहुत अच्छी बाल कविता... कृष्ण कुमार जी को बधाई...और रावेंद्र जी को शुक्रिया

चंदन कुमार झा ने कहा…

सच में जोकर तो रंग रंगीला ही होता है, सदा हँसने और हँसाने वाला । बहुत सुन्दर बालकविता । और तस्वीर के तो क्या कहने !!!

अच्छी बालकविता एवं तस्वीर के लिये कृष्णकुमार जी और सरस पायस के संपादक रावेंद्रकुमार जी का बहुत बहुत धन्यवाद । शुभकामनायें !!!

हर्षिता ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता ।

संजय भास्कर ने कहा…

रंग रंगीला जोकर ... बहुत सुंदर रचना।

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar ने कहा…

झूला झूले चहक-चहककर,
चढ़े सायकिल, तो लहराए।
कितना अच्छा है यह जोकर,
कभी किसी को नहीं रुलाए । वाह---बहुत प्यारा बालगीत है कृष्ण कुमार जी का--उन्हें हार्दिक बधाई। चित्र भी बहुत प्यारा लगाया है आपने।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना!

सीमा सचदेव ने कहा…

bahut sundar baal-geet

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

मन मर्जी का मालिक है ये,
"जो कर" यह कहलाए.
बच्चा, बूढ़ा, नर और नारी,
सबके मन को भाए.
दीनदयाल शर्मा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

हरकत उलटी-सीधी करना!
बहुत कठिन है जोकर बनना!

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

कित्ता प्यारा जोकर है. खूब हँसाता है..मन को भाता है.

***************
'पाखी की दुनिया' में इस बार "मम्मी-पापा की लाडली"

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

और हाँ, ये तो मेरे पापा की कविता है..पापा को भी बताउंगी.

mrityunjay kumar rai ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता

Dr. Brajesh Swaroop ने कहा…

बचपन में देखा सर्कस का जोकर याद आ गया. भाई कृष्ण कुमार जी को बधाई व रवि जी को भी बधाई इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए.

Rashmi Singh ने कहा…

बहुत दिनों बाद जोकर जी का दर्शन हुआ..बड़ी मनभावन कविता लिखी के.के. जी ने..शुभकामनायें.

Amit Kumar ने कहा…

बड़ा मजेदार बाल गीत. गुनगुना रहा हूँ.

Ghanshyam ने कहा…

अद्भुत जोकर. अद्भुत गीत.

Bhanwar Singh ने कहा…

अजी मान गए कृष्ण कुमार जी के जोकर को.

अभिलाषा ने कहा…

रंग रंगीला जोकर मेरे दिल को भाये.
उछल कूद कर सबके दिल को हर्षाये.

Ratnesh ने कहा…

बहुत अच्छी बाल कविता... कृष्ण कुमार जी को बधाई...और रावेंद्र जी को शुक्रिया

KK Yadava ने कहा…

धन्यवाद रवि जी, आपने मेरी बाल-कविता को यहाँ स्थान दिया. आपने इसे बड़ी खूबसूरती से पेश किया है...

KK Yadava ने कहा…

आप सभी का टिप्पणियों और प्रोत्साहन के लिए आभार.

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

प्रिय कृष्ण कुमार जी!
सुंदर कवियों की
सुंदर रचनाओं को
सुंदर ढंग से
प्रस्तुत करने में
मुझे बेहद ख़ुशी होती है!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

आप सबकी विशिष्ट टिप्पणियों ने
मुझे इस कार्य को
और भी सुंदर रूप देने के लिए
अभिनव ऊर्जा प्रदान की है!
--
आप सबका हृदय से आभारी हूँ!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

चर्चा मंच पर
महक उठा मन
शीर्षक के अंतर्गत
इस पोस्ट की चर्चा की गई है!

--
संपादक : सरस पायस

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