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सोमवार, जून 06, 2011

हरा-भरा रहे अपना जहाँ ...... : सरस चर्चा (३५)

इस चर्चा की शुरूआत हम चैतन्य द्वारा 
दिए गए एक प्रेरक संदेश और उसकी चित्रकारी से करेंगे!

विश्व पर्यावरण दिवस पर दुनिया-भर में 
अपनी प्रकृति माँ को सहेजने की बात की जाती है, 
लेकिन हमें हर दिन ही पर्यावरण की रक्षा की बात सोचनी चाहिए 
ताकि हमारे साथ-साथ पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़,  कई तरह के जानवर 
और प्यारे-प्यारे पक्षी सभी सुरक्षित रह सकें! 


यह चित्र भी देखते हैं, जिसमें चिन्मयी और उसके दोस्त 
पर्यावरण को बचाने के लिए जी-जान से लगे हुए हैं!


अभिनव सृजन पर डॉ. नागेश पांडेय संजय भी अपने गीत 
के माध्यम से पेड़ लगाने का आह्वान कर रहे हैं! 


आओ पेड़ लगाएँ
सारे जग के शुभचिंतक, ये पेड़ बहुत उपकारी।

नन्हे सुमन के साथ डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक भी 
कुछ ऐसा ही कह रहे हैं! 


वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं,
इनकी रक्षा करना होगा।
जीवन जीने की खातिर,
वन को जीवित रखना होगा।


तैरना तो नहीं आता, पर कोशिश करने में क्या जाता है? 


कुहू की प्यारी दुनिया में देखिए कुहू की मस्ती!


नन्ही परी ने इस बार समुद्र-तट पर पिकनिक मनाई!


अब तो भूख लगने लगी! 
चलो, चलते हैं पंखुरी की रसोई में! 
जो खाना चोहोगे, वह खिलाएगी! 



लगे हाथों, लविज़ा के साथ 
पानी-पूरी (बताशों) का स्वाद भी चख लेते हैं!


Laviza

बाल-मंदिर में अपका इंतज़ार कर रही हैं मूँछें नत्थूलाल की!


आदित्य इस बार एयर फोर्स म्यूजियम की सैर करा रहा है!


बच्चों का कोना में आपको पता चलेगा कि ... ... . 

गर्मी कितनी खुशियाँ लाती, पढ़ने से छुट्टी हो जाती!
छुट्टी  में नानी  घर जाते, नए-नए हैं दोस्त बनाते!



क्या तारे चंदा मामा के बच्चे होते हैं? 
सुनैना अवस्थी अपने इस गीत में 
बहुत सुंदर ढंग से बता रही हैं! 
नील गगन  के  प्यारे  तारे, 
लगते  कितने  न्यारे तारे। 
चम-चम-चम-चम चमक रहे हैं,
 जुगनू जैसे दमक रहे हैं। 


सरस पायस पर इस बार एक अनुरोध किया गया है!

मेरी मुस्कान ही सब कुछ कहती है!

लविज़ा का कहना है! 


                 लविज़ा ने एक फ़ोटो प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है! 


८ जून की मध्य-रात्रि तक उसे वोट दिया जा सकता है!

अंत में एक मोहक अदा यह भी देख लें तो मन महक जाएगा! 


रावेंद्रकुमार रवि

9 टिप्‍पणियां:

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

धन्यवाद जी , आज ही राजस्थान की पत्रिका बाल वाटिका मेँ आपकी खूब चर्चा और सराहना देखी . बधाई . निःसंदेह उत्तराखंड मेँ बालसाहित्य का ध्वज फहराने मेँ आपका प्रणम्य अवदान है .

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सभी दोस्तों के ब्लोग्स की प्यारी चर्चा..... थैंक यू

Coral ने कहा…

बहुत प्यारी चर्चा ...धन्यवाद

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

वाह, सुन्दर और मनभावन चर्चा !

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

Mr. Raja Lambert commented on facebook about this post --

Raja wrote:
"You are right Ravindra ji....
unless we preserve our nature, plants, animals and birds.......
we can't think of conservation of our nature.
These Animals, birds, trees
and wild life is the link
between development and destruction of nature........
Good Article and at a very good time.........
Thanks again for such nice issues."

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सरस चर्चा!

Kashvi Kaneri ने कहा…

अपने सभी दोस्तों को एक ही ब्लांग में देख कर बड़ा मजा आया……हम भी चर्चा में हैं अच्छा लगा धन्यवाद……

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सरस और मोहक चर्चा..

सुनैना अवस्थी ने कहा…

आदरणीय भाई जी ,
आपका ब्लाग देखकर बड़ी प्रसन्नता हुयी .
वाकई आपका प्रयास बहुत ही सुन्दर है .
आप तो इतने बड़े साहित्यकार हैं . आपने मेरे जैसी नयी ब्लागर को इतना प्रोत्साहन दिया , मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करती हूँ .

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