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शुक्रवार, जून 24, 2011

चिड़िया रानी नहा रही है : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत


चिड़िया रानी नहा रही है


फव्वारे के नीचे बैठी,
चिड़िया रानी नहा रही है!

पानी के बुलबुले देखकर,
वह अपने पर फुला रही है!
पंख फुलाए, छप-छप करती,
गीत सुरीला सुना रही है!
चिड़िया रानी नहा रही है!

मीठा फल खाएगी चुनकर,
चोंच खोलकर बता रही है!
ख़ूब नहाकर भूख लगी अब,
खाने का मन बना रही है!
चिड़िया रानी नहा रही है!

रावेंद्रकुमार रवि

7 टिप्‍पणियां:

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (25.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

yogendra ने कहा…

सुंदर कोमल और संवेदनशील भाव
बेहद खूबसूरत कविता.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सरस पायस के अनुरूप बहुत सुन्दर रचना प्रस्तुत की है आपने!

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता....

Patali-The-Village ने कहा…

बेहद खूबसूरत कविता|

sudhir saxena 'sudhi' ने कहा…

चुनमुन-सी चिड़िया जैसी ही सुन्दर रचना!
-'सुधि'

शुभम जैन ने कहा…

अरे वाह ये चिड़िया रानी तो बिलकुल इशिता की 'पिको' जैसी है |

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