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सोमवार, जून 20, 2011

चकमक में सजी राज कुमारी की दो कविताएँ

बाल विज्ञान पत्रिका चकमक का
जून 2011 का अंक भी हमेशा की तरह
विशेष सज-धज के साथ ही आया है!
उसके मुखपृष्ठ पर छपी रचना ने ही मन मोह लिया!
- आप भी पढ़िए -
कविता को स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए
चूज़े (मुर्गी के बच्चे) पर चट्का लगाइए!

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत प्यारी रचनायें.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया!

Sunil Kumar ने कहा…

वाह बहुत सुंदर ...

शुभम जैन ने कहा…

bahut hi payari rachnaye hai...aur mukhyprishth bhi bahut ahccha laga...

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