"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

रविवार, जून 26, 2011

उसको क्यों खा जाते हो? : निरंकारदेव सेवक की शिशुकविता

उसको क्यों खा जाते हो?

लाल टमाटर! लाल टमाटर!
मैं तो तुमको खाऊँगा।

रुक जाओ, मैं थोड़े दिन में
और बड़ा हो जाऊँगा।

लाल टमाटर! लाल टमाटर!
मुझको भूख लगी भारी।

भूख लगी है तो तुम खा लो
ये गाजर-मूली सारी।

लाल टमाटर! लाल टमाटर!
मुझको तो तुम भाते हो।

जो तुमको भाता है, भैया!
उसको क्यों खा जाते हो?

निरंकारदेव सेवक

9 टिप्‍पणियां:

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

यह रचना जितनी बार भी पढ़ता हूँ उतनी ही ताज़ी लगती है. यह सेवक जी की कालजयी रचना है.
सचमुच... 'निरंकार देव सेवक' जी ने बाल साहित्य की मन से सेवा की है.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

अरे वाह! सुन्दर रचना. अपने बरेली की ही विभूति सेवक जी से तो वैसे भी लगाव है।

मनोज कुमार ने कहा…

अति सुंदर।

शुभम जैन ने कहा…

बहुत सुंदर गीत और बहुत सुन्दर प्रस्तुति|

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुंदर बाल गीत और सुन्दर प्रस्तुति|

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत प्यारी सी कविता ...

purnima ने कहा…

बहुत प्यारी सी कविता !!!!!!!!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सचमुच... 'निरंकार देव सेवक' जी की बाल कविता बहुत सुन्दर है!

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Related Posts with Thumbnails

"सरस पायस" पर प्रकाशित रचनाएँ ई-मेल द्वारा पढ़ने के लिए

नीचे बने आयत में अपना ई-मेल पता भरकर

Subscribe पर क्लिक् कीजिए

प्रेषक : FeedBurner

नियमावली : कोई भी भेज सकता है, "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ रचनाएँ!

"सरस पायस" के अनुरूप बनाने के लिए प्रकाशनार्थ स्वीकृत रचनाओं में आवश्यक संपादन किया जा सकता है। रचना का शीर्षक भी बदला जा सकता है। ये परिवर्तन समूह : "आओ, मन का गीत रचें" के माध्यम से भी किए जाते हैं!

प्रकाशित/प्रकाश्य रचना की सूचना अविलंब संबंधित ईमेल पते पर भेज दी जाती है।

मानक वर्तनी का ध्यान रखकर यूनिकोड लिपि (देवनागरी) में टंकित, पूर्णत: मौलिक, स्वसृजित, अप्रकाशित, अप्रसारित, संबंधित फ़ोटो/चित्रयुक्त व अन्यत्र विचाराधीन नहीं रचनाओं को प्रकाशन में प्राथमिकता दी जाती है।

रचनाकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ भेजी गई रचना को प्रकाशन से पूर्व या पश्चात अपने ब्लॉग पर प्रकाशित न करें और अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित न करवाएँ! अन्यथा की स्थिति में रचना का प्रकाशन रोका जा सकता है और प्रकाशित रचना को हटाया जा सकता है!

पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!

"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।

अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।

आवृत्ति