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शनिवार, अप्रैल 23, 2011

मैं चाहूँ ख़ूब खेलना : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत


मैं चाहूँ ख़ूब खेलना




मैं गाऊँ एक तराना, 
ख़ुशियों की बात बताना!


मैं चाहूँ हर पल हँसना, 
फूलों की तरह महकना!
फूलों से बातें करती,
तितली के जैसे उड़ना!

मेरा मन है नन्हा-सा,
इसको मत कभी दुखाना!

मैं गाऊँ ... ... .


मैं चाहूँ ख़ूब खेलना,
चिड़िया की तरह फुदकना!
इस फुदक रही चिड़िया के,
बच्चों की तरह किलकना! 

मैं खेलूँ, फिर मुस्काऊँ,
मुझको मत कभी सताना!

मैं गाऊँ ... ... .

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रावेंद्रकुमार रवि
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(चित्र में हैं : विश्वबंधु)
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8 टिप्‍पणियां:

Coral ने कहा…

मैं खेलूँ, फिर मुस्काऊँ,
मुझको मत कभी सताना!

बहुत खूबसूरत ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

अर वाह!
बहुत सुन्दर बालगीत है यह तो!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत खूबसूरत बालगीत

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर कविता ....सुंदर फोटो

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत खूबसूरत बालगीत|

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता. ..बधाई.
________________________
'पाखी की दुनिया' में 'पाखी बनी क्लास-मानीटर' !!

रंजन (Ranjan) ने कहा…

Happy Birthday!

purnima ने कहा…

मैं चाहूँ हर पल हँसना,
फूलों की तरह महकना!


सुंदर कविता !!!!!!!!!

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