"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

गुरुवार, जनवरी 14, 2010

एक चील जो चाँद पे अंडे देती थी ... ... . : सुशील शुक्ल की एक ताज़ा बालकविता

हिंदी में बच्चों के लिए प्रकाशित होनेवाली सबसे बढ़िया पत्रिका है -
चकमक के संपादक सुशील शुक्ल 
बहुत ही अनूठे अंदाज़ में बच्चों के लिए कविताएँ रचते हैं!
अभी कुछ देर पहले फोन पर मुझे उनसे इस कविता को 
"सरस पायस" पर प्रकाशित करने की अनुमति मिली! 
बिना एक भी पल गँवाए आभार और प्रसन्नता के साथ 
 मैं उनकी यह कविता आप सबके सम्मुख रख रहा हूँ!
"कविता को स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए कविता के ऊपर कहीं भी क्लिक् कर दीजिए!"

"सभी आदरणीय टिप्पणीकारों से विनम्र अनुरोध है कि 
इस कविता के लिए समीक्षात्मक टिप्पणी करने का प्रयास करें!" 

शनिवार, जनवरी 09, 2010

रंग-रँगीली : कृष्णकुमार यादव की एक बालकविता

रंग-रँगीली

चिड़िया रानी चूँ-चूँ करके
सबको सुबह जगाती है!
रंग-रँगीली चहक-चहककर
सबका मन हर्षाती है!


आँगन में बिखरे दानों को
फुदक-फुदककर खाती है!
अगर पकड़ने दौड़ो उसको
झट से वह उड़ जाती है!


जितना भी दौड़ें हम बच्चे,
उतना हमें छकाती है!
फुर्र-फुर्रकर आसमान में
कलाबाजियाँ खाती है!

कृष्णकुमार यादव

7 comments:


संगीता पुरी ने कहा…
बहुत प्‍यारा बालगीत लिखा है ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…
सुबह-सुबह ही चिड़िया रानी, आंगन में आ जाती है। इधर-उधर बिखरे चावल के, दाने सब खा जाती है। फुर्र से उड़ जाती यह, जब हम करते कुछ मक्कारी। चिड़िया रानी, मुझको और, भैया को लगती है प्यारी।

JHAROKHA ने कहा…
आँगन में बिखरे दानों को फुदक-फुदककर खाती है! अगर पकड़ने दौड़ो उसको झट से वह उड़ जाती है! रावेन्द्र जी , बहुत अच्छा बालगीत है कृष्ण कुमार जी का ..उन्हें मेरी बधाई पहुंचाएं.

अरविंद राज ने कहा…
chidiya hamesha se hi bachchoo ke liye aakarshan ka kendra rahi hai. Iski sundar baton ki sundar prastuti hui hai Saras Payas Par. Achcha Laga!

अरविंद राज ने कहा…
chidiya hamesha se bachchon aur kaviyon ke beech vartalaap ka ek shaahakt madhyam rahi hai. Is kadi mein prastut balgeet ek bahut hi SARAS prayas hai. Badhai

डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी ने कहा…
जितनी सुन्दर चिडिया रानी !उससे सुन्दर उसकी कहानी !! बधाई यादव जी !

irdgird ने कहा…
कविता पढ़कर बचपन और चिडि़या याद आई। पहले घर में चिडि़या और उसके घोंसले दिखाई पड़ते थे लेकिन अब चहचहाट सुननी हो तो आबादी से कहीं दूर जाना पड़ता है। कंक्रीट के जंगलों में अब उनके बसेरे कहां।

रविवार, जनवरी 03, 2010

शुभकामनाएँ : जिन्होंने खिला दी ओंठों पर मधु-मुस्कान

ओंठों पर मुस्कान खिलाती शुभकामनाएँ
प्रस्तुतकर्त्ता - रावेंद्रकुमार रवि

मुझे कई बच्चों के शुभकामना-पत्र मिले!   
आप भी देखिए इनकी कुछ झलकियाँ!
 
 बुलबुल की चोंच में अंगूर का गुच्छा,
नया साल मुबारक़ हो - यही हार्दिक इच्छा!

सूरज निकलता है - धरती का शृंगार बनके,
नया साल मुबारक़ हो - फूलों का हार बनके!

आपकी हर रात चाँद बनके आए, 
दिन का उजाला शाम बनके आए! 
कभी दूर न हो आपके चेहरे की हँसी,
नया साल ऐसा मेहमान बनके आए!

आलू बड़े-बड़े - गोभी सड़े-सड़े,
नया साल मुबारक़ हो - रजाई में पड़े-पड़े!

फूल हैं, चंदन है - रिश्तों का बंधन है, 
नए वर्ष पर आपका - हार्दिक अभिनंदन है!

जहाँ की हर ख़ुशी - हँसी माँगे आपसे, 
बाग़ का हर फूल - ख़ुशबू माँगे आपसे! 
आपकी ज़िंदगी में हो - इतनी रोशनी कि 
हर बिजलीवाला - कनेक्शन माँगे आपसे!

क्या कोई एस.एम.एस. या ई-मेल इनकी बराबरी कर सकता है?
बीच-बीच में लिखी पंक्तियाँ : रवि व सुमन के सौजन्य से

शुक्रवार, जनवरी 01, 2010

महके हृदय तुम्हारा : रावेंद्रकुमार रवि की मन महकाती कविता

महके हृदय तुम्हारा

नए वर्ष की
नई सुबह में
फूटी रवि की
नव किरणों-से
चमकें स्वप्न तुम्हारे!
होकर फिर साकार
करें जीवन उजियारा,
ख़ुशियों की सुगंध से
महके हृदय तुम्हारा!

रावेंद्रकुमार रवि

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चारुबेटा,
खटीमा, ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड (भारत) - 262 308.


ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

हार्दिक शुभकामनाऍं। जाकिर अली रजनीश
sushil ने कहा…

kamaal hai! WONDERFULL. NAYE SAAL MAIN..... KHWABON KA AIK AIK DANA AKURAYE HAR PAUDHE PAR JEEVAN GUCHCHHE GUCHCHHE AAYE SURAJ CHAND NADI PAHAD JAISE SABKE HAIN VAISE HI HAR SHAY HAREK KE HISSE AAYE.
Arvind ने कहा…

नए वर्ष की प्रथम भोर इतनी सरस होगी, सोचा न था। "सरस पायस" का प्रवेशांक रुचिकर लगा। यह प्रयास लोकप्रिय हो और प्रगति के पथ पर आगे बढ़े ... जाल पर अपना संजाल बुने ... इन्हीं शुभकामनाओं के साथ - - अरविंद "राज"
डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…
सुख का सूरज उगे गगन में, दु:ख का बादल छँट जाए। हर्ष हिलोरें ले जीवन में, मन की कुंठा मिट जाए। चरैवेति के मूल मंत्र को अपनाओ निज जीवन में - झंझावातों के काँटे पगडंडी पर से हट जाएँ।

PD ने कहा…
are vaah.. badhiya blog banaya hai.. aapak dhanyavaad jo aapne apne blog ka link mujhe mail kiya.. aur han, nav varsh mangal may ho.. :)

KK Yadav ने कहा…

बेहद सुन्दर.मुबारक हो !!
नरेंद्र कुमार ने कहा…

आज मैंने तुम्हारा सरस पायस देख ही लिया। बहुत अच्छे ढंग से व्यवस्थित किया है। रंगों का संयोजन तो और भी अधिक सुंदर है। बधाई!

सहज साहित्य ने कहा…

भाई रावेन्द्र रवि जी नमस्कार ! आपका ब्लॉग देखा । आपने बहुत अच्छा काम किया है । बच्चों की कदम-कदम पर घोर उपेक्षा है । आपका यह कार्य नाम के अनुरूप ही है ।एन बीटी में आपकी पुस्तक मैंने देखी थी ।इस तरह की पुस्तकों की नितान्त आवश्यकता है ।विषय वह कठिन है ,जिसमें बच्चे की रुचि नहीं है॥ रोचक बनाना एक कला है और वह कलाकार है शिक्षक ।मैंने40 वर्ष के शिक्षण और 14-15 साल प्राचार्य के रूप में यही जाना है कि तथाकथित खराब बच्चों को अच्छा बनाया जा सकता है ;यदि प्राचार्य और शिक्षक मिलकर टीम की तरह काम करें । आप डटे रहिए ।एक दिन आप नई ऊँचाई प्राप्त करेंगे । ब्लॉगर में आपका ई मेल सही से नहीं आ रहा है ।प्रतिक्रिया के लिए तो उसी में ऑप्शन है । www.kavitakosh.org तथा www.patang-ki-udan.blogspot.comपर मेरी बाल कविताएँ यूनिकोड में है ।जो आपको लेनी हों वहाँ से भी ले सकते है । पायस का लिंक मैं अपने ब्लॉगर पर भी दे रहा हूँ । आपकी सफलता की कामaन के सा रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' rdkamboj@gmail.com mobile- 09313727493
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