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सोमवार, मार्च 14, 2011

बिल्लू : रावेंद्रकुमार रवि की शिशुकविता



बिल्लू


बिल्ली का बच्चा,
देखो, कितना अच्छा!

दूध-मलाई खाता,
अपनी पूँछ हिलाता!
मुझे बहुत ही भाता!

 रावेंद्रकुमार रवि  

9 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बिल्लू की कविता और फोटो मजेदार है....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत प्यारा है बिल्ली का बच्चा!
दूध-मलाई खाकर यह जल्दी ही हृष्ट-पुष्ट हो जाएगा!
--
बहुत बढ़िया शिशुगीत!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

प्यारा शिशुगीत...

Coral ने कहा…

bahut sundar

माधव( Madhav) ने कहा…

sundar

Deepak Saini ने कहा…

बहुत बढ़िया शिशुगीत!

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

रवि जी मैं भी सुनाना चाहूँगा एक कविता :

.
रोज़
स्याह बिल्ली
काटती है
– रास्ता.

सोचता हूँ
मैं भी गुज़र जाऊँ
उसके रास्ते से
— देखूँ... हुवेगा क्या?

मगर
दो मासूम बच्चे
देख उसके
सोचता हूँ – 'अभी नहीं'.
.

JHAROKHA ने कहा…

ravendra ji
pyari si billi ke jaisi aapka yah
bal geet bhi bahut hi pyara laga.
bachho ko bhi achhi lagi
dhanyvaad
poonam

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत प्यारा-गीत भी और बिल्ली का बच्चा भी...

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