"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

बुधवार, सितंबर 08, 2010

कबूतर के चूज़े : रावेंद्रकुमार की नई शिशुकविता

------------------------------------------------------------------------------------

♥♥ कबूतर के चूज़े ♥♥

------------------------------------------------------------------------------------

------------------------------------------------------------------------------------

गुटर-गुटर-गूँ
करके तुमको,
रोज़ सुनाएँगे ये गान!

नन्हे-प्यारे
हैं ये चूज़े,
रखना इनका हरपल ध्यान!

------------------------------------------------------------------------------------

------------------------------------------------------------------------------------

♥♥ रावेंद्रकुमार रवि ♥♥

------------------------------------------------------------------------------------

सोमवार, सितंबर 06, 2010

कान्हा मेरे मन का मीत : सरस चर्चा (12)

छम-छम करती नन्ही-प्यारी बहना आई है!

यह कहते हुए "सरस पायस" ने सबको
अपनी नई-नवेली बहन "रुनझुन" से मिलवाया,
जो अभी से ख़ूब मीठी-मीठी बातें करने लगी है!
चलिए, कुछ देर के लिए उसकी प्यारी-प्यारी बतियाँ सुनने के लिए चलें!


पिछले दिनों सबसे ज़्यादा धूम रही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की!
चलिए, इस सी-प्लेन पर बैठकर चलते हैं, पाखी की दुनिया में!


पाखी की दुनिया में माखन-चोर कुछ इस तरह से आए!


ज़रा देखिए तो सही, आदित्य साहू आपको क्या दिखा रहा है?
"आइए-आइए, दोस्तो! देखिए तो अनन्या दीदी को!
कितनी प्यारी लग रही हैं राधा बनकर! है ना?


साथ में किशन बना उनका दोस्त भी कितना अच्छा लग रहा है!


अब देखिए नन्ही परी इशिता की यह मोहनी मुस्कान!
मटकी फूटने पर उसने ख़ूब तालियाँ बजाईं और जी-भरकर नृत्य किया!


बाल-संसार में "बाघ" पर एक अच्छी कविता छपी है!
आइए इसे पढ़ते हैं चलकर!
यह बाघ के बारे में हमको क्या-क्या बता रही है!


कुल्लू में स्पर्श और चुलबुल ने शॉल बुनकर देखा!


शिक्षक-दिवस पर स्पर्श ने अपनी अंबिका मैम को
एक बहुत सुंदर शुभकामना-पत्र बनाकर दिया!
आप भी देखिए वे इतना प्यार उपहार पाकर कितनी ख़ुश हैं!


"मेरी इन जुल्फ़ों को अंतिम बार देख लीजिए!"
गंगा के किनारे खड़ा माधव यही कह रहा है!
पर वोवाली फ़ोटो देखने के लिए तो कुछ प्रतीक्षा करनी पड़ेगी!


राज भाटिया आपको नन्हे-मुन्ने के माध्यम से
एक बहुत बढ़िया सौगात दे रहे हैं!


लविज़ा को तो देखिए! अपने विद्यालय में
नई-नई गतिविधियों में भाग लेते हुए कितनी ख़ुश है!

Laviza @ School

अंत में पढ़िए "नन्हा मन" पर सजा मेरा एक शिशुगीत!

♥♥ आज सुना दे ♥♥

आज सुना दे मुझको कान्हा,
अपनी बाँसुरिया की धुन!


(चित्र में हैं : सरस पायस और उनकी सखी गरिमा रुबाली,
जब वे 1999 में नर्सरी में पढ़ते थे)

रावेंद्रकुमार रवि

शनिवार, सितंबर 04, 2010

तुम भारत की फुलवारी : डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी का नया बालकविता-संग्रह

----------------------------------------------------------------------------------------
----------------------------------------------------------------------------------------
"इस भारत की फुलवारी तो आप ही हो, जिसकी महक से
न केवल अपना देश, बल्कि सारा विश्व महकता है!"
----------------------------------------------------------------------------------------
यह कहते हुए डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी ने अपना नया
संदेशात्मक बालकविता-संग्रह नन्हे दोस्तों को समर्पित किया है!

----------------------------------------------------------------------------------------
इस संग्रह में विभिन्न विषयों पर उनकी 25 बालकविताएँ संकलित हैं!
हर पृष्ठ टिकाऊ और रंगीन है!

----------------------------------------------------------------------------------------
अरविंद राज ने सुंदर चित्रों के साथ
इसके हर पृष्ठ को बहुत मेहनत से सजाया है!

----------------------------------------------------------------------------------------
----------------------------------------------------------------------------------------
आइए इस संकलन की एक कविता पढ़ते हैं!
----------------------------------------------------------------------------------------
नाव चली नानी के गाँव

बादल दादा ने जब आकर,
धरती माँ की प्यास बुझाई।
झूम उठे तब बाग-बगीचे,
पौधों ने ली फिर अँगड़ाई।

बिखर गई हरियाली चहुँदिश,
खिलकर सभी पुष्प मुस्काए।
लिली-चमेली ने तितली को,
मौसम के जयगान सुनाए।

सूर्य-किरण औ' नन्ही बूँदें,
खेल रही हैं आँख-मिचोली।
इंद्रधनुष भी नीलगगन में,
सजा रहा सुंदर रंगोली।

कागज की नावें ले-लेकर,
निकल पड़े हैं नन्हे पाँव।
तैराते ही सब चिल्लाए,
नाव चली नानी के गाँव।

डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी
----------------------------------------------------------------------------------------
----------------------------------------------------------------------------------------
इस पुस्तक का मूल्य है - रु.साठ मात्र,
पर "सरस पायस" के पाठक इसे आधे मूल्य में
निम्नांकित पते से मँगा सकते हैं!

----------------------------------------------------------------------------------------
शोभा प्रकाशन
आनंदपुरम् कॉलोनी, बीवीजई चौराहा
कनौजिया अस्पताल के पीछे, शाहजहाँपुर (उ.प्र.) - 242001
----------------------------------------------------------------------------------------
चलभाष : 9415035767 और 9936604767
----------------------------------------------------------------------------------------
ई-मेल : deshbandhu1@rediffmail.com
----------------------------------------------------------------------------------------

गुरुवार, सितंबर 02, 2010

मेरा मीत : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत


♥♥ मेरा मीत ♥♥

सबके मन को लेता जीत,
मेरा कान्हा, मेरा मीत!



मुरली की धुन मधुर बजाकर,
ख़ूब सुनाता मीठे गीत!

मेरा कान्हा, मेरा मीत!

जो भी साथ खेलता इसके,
उसकी हरदम होती जीत!

मेरा कान्हा, मेरा मीत!

माखन इसे बहुत भाता है,
सबसे अच्छी इसकी प्रीत!

मेरा कान्हा, मेरा मीत!

रावेंद्रकुमार रवि
------------------------------------------------------------------------------------
(चित्र में : सरस पायस और गरिमा रुबाली, जब वे नर्सरी में पढ़ते थे, 1999)
----------------------
------------------------------------------------------------------------------------
Related Posts with Thumbnails

"सरस पायस" पर प्रकाशित रचनाएँ ई-मेल द्वारा पढ़ने के लिए

नीचे बने आयत में अपना ई-मेल पता भरकर

Subscribe पर क्लिक् कीजिए

प्रेषक : FeedBurner

नियमावली : कोई भी भेज सकता है, "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ रचनाएँ!

"सरस पायस" के अनुरूप बनाने के लिए प्रकाशनार्थ स्वीकृत रचनाओं में आवश्यक संपादन किया जा सकता है। रचना का शीर्षक भी बदला जा सकता है। ये परिवर्तन समूह : "आओ, मन का गीत रचें" के माध्यम से भी किए जाते हैं!

प्रकाशित/प्रकाश्य रचना की सूचना अविलंब संबंधित ईमेल पते पर भेज दी जाती है।

मानक वर्तनी का ध्यान रखकर यूनिकोड लिपि (देवनागरी) में टंकित, पूर्णत: मौलिक, स्वसृजित, अप्रकाशित, अप्रसारित, संबंधित फ़ोटो/चित्रयुक्त व अन्यत्र विचाराधीन नहीं रचनाओं को प्रकाशन में प्राथमिकता दी जाती है।

रचनाकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ भेजी गई रचना को प्रकाशन से पूर्व या पश्चात अपने ब्लॉग पर प्रकाशित न करें और अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित न करवाएँ! अन्यथा की स्थिति में रचना का प्रकाशन रोका जा सकता है और प्रकाशित रचना को हटाया जा सकता है!

पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!

"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।

अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।