गुरुवार, नवंबर 03, 2011
जलेबी की मिठास-जैसा : यदि ऐसा हो जाए (कविता-संकलन)
मंगलवार, जुलाई 19, 2011
'सावन' गाता मौसम आया : रावेंद्रकुमार रवि की बालकविता
बुधवार, जून 22, 2011
सोमवार, जून 20, 2011
चकमक में सजी राज कुमारी की दो कविताएँ
मंगलवार, जून 14, 2011
ऐसी खुशी मिली मुझको : रावेंद्रकुमार रवि की नई बालकविता
शनिवार, मई 07, 2011
प्यारी माँ की गोद में - रावेंद्रकुमार रवि की बालकविता
शुक्रवार, मार्च 18, 2011
प्रेम-रंग ऐसे बरसाना : होली पर अरविंद-रवि की साझा कविता

होली का संदेश मधुर है,
रवि -- "सदा प्यार से तुम मिलना!" -- रवि
काँटों-जैसे कभी न बनना,
अरविंद -- सदा फूल से तुम खिलना! -- अरविंद
कालिख नहीं पोतना मुँह पर,
रवि -- बस गुलाल ही तुम मलना! -- रवि
भूल-भालकर बैर पुराने,
अरविंद -- गले सभी से तुम मिलना! -- अरविंद
होली में सारी बुराइयाँ,
रवि -- फूँक जलाकर तुम देना! -- रवि
"सदा करेंगे काम भले हम",
अरविंद -- आज यही प्रण तुम लेना! -- अरविंद
बचे न कोई संगी-साथी,
रवि -- तन-मन से सबको रँगना! -- रवि
प्रेम-रंग ऐसे बरसाना,
अरविंद -- भीग जाय हर घर-अँगना! -- अरविंद
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रावेंद्रकुमार रवि और अरविंद राज
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शुक्रवार, मार्च 04, 2011
प्यारी-सी पगडंडी : डॉ. मोहम्मद साजिद ख़ान की बालकविता
शनिवार, फ़रवरी 26, 2011
अपनी बेरी गदराई है : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक की बालकविता
लगा हुआ है इनका ढेर। ठेले पर बिकते हैं बेर।। रहते हैं काँटों के संग। इनके हैं मनमोहक रंग।। जो हरियल हैं, वे कच्चे हैं। जो पीले हैं, वे पक्के हैं।। ये सबके मन को ललचाते। हम बच्चों को बहुत लुभाते।। शंकर जी को भोग लगाते। व्रत में हम बेरों को खाते।। ऋतु बसंत की मन भाई है। अपनी बेरी गदराई है।। डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक |
रविवार, फ़रवरी 20, 2011
भाईचारा हमें सिखाती : रावेंद्रकुमार रवि की नई बालकविता
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मेरी "नयना" इस मैना को,
हलुआ-पूरी रोज़ खिलाती!
सुंदर बहुत पंख हैं इसके,
हम सबको यह बहुत लुभाती!

चोंच उठाकर चलते नल से,
गट-गटकर पी लेती पानी!
फुदक-फुदककर जब यह चलती,
लगती है चिड़ियों की रानी!
अपनी मीठी बोली से यह,
हम सबका मन है हर्षाती!
रहती है समूह में हिलमिल,
भाईचारा हमें सिखाती!
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♥♥ रावेंद्रकुमार रवि ♥♥
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मंगलवार, फ़रवरी 08, 2011
गुरुवार, जनवरी 27, 2011
सबसे मीठा-मीठा बोलो : सुभद्राकुमारी चौहान की बालकविता
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चित्र में नर कोयल है! नर कोयल ही गाता है! मादा कोयल गाना नहीं जानती!
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गुरुवार, दिसंबर 30, 2010
पापा, कैसे करूँ पढ़ाई : डॉ. बलजीत सिंह की बालकविता
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