गुरुवार, नवंबर 03, 2011
जलेबी की मिठास-जैसा : यदि ऐसा हो जाए (कविता-संकलन)
शनिवार, जून 18, 2011
कोई युक्ति सुझाओ : डॉ. नागेश पांडेय संजय की शिशुकविता
कोई युक्ति सुझाओ
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(चित्र में हैं : आदित्य रंजन)
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रविवार, दिसंबर 26, 2010
रुको कबूतर : डॉ. नागेश पांडेय "संजय" की नई शिशुकविता
शुक्रवार, नवंबर 26, 2010
फुदक-फुदककर : डॉ. नागेश पांडेय संजय की शिशुकविता

शनिवार, नवंबर 06, 2010
सूखें तो किशमिश बन जाते : डॉ. नागेश पांडेय संजय की बालग़ज़ल

सोमवार, अक्टूबर 18, 2010
अपलम-चपलम : डॉ. नागेश पांडेय संजय की नई पुस्तक

रविवार, अगस्त 08, 2010
तब तक-तब तक : डॉ. नागेश पांडेय संजय का एक शिशुगीत
मंगलवार, फ़रवरी 09, 2010
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की : डॉ॰ नागेश पांडेय संजय की एक बालकविता
मधुर कान में काली कोयल गाए मस्त मल्हार!
लदे बौर से पेड़ आम के मस्त हवा संग झूमें!
डॉ॰ नागेश पांडेय संजय
5 comments:
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हरि ने कहा… - अति सुंदर बालगीत। हमें भी फाल्गुन की सुध आई। बधाई।
- February 27, 2009 11:59 PM
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा… - सुन्दर चित्रों के माध्यम से, रंग बिखेरे होली के। फागुन आया, संग में लाया, मधुर तराने होली के। सुन्दर बाल गीत में, सुन्दर-सुन्दर रंग भरे हैं। वाह-वाह लिखने को, सतरंगी अक्षर उभरे हैं।।
- February 28, 2009 8:13 AM
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seema gupta ने कहा… - " jitne sundr prakrtik chitr, utne hi sundr shabd....dil ko bha gye...behd mnmohak" regards
- February 28, 2009 4:32 PM
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रावेंद्रकुमार रवि ने कहा… - ब्लॉगर creativekona ने कहा… भाई रावेन्द्र जी , डा.देशबंधु जी के साथ ही डा .नागेश जी का बालगीत ,इनके साथ ही आपके द्वारा खींचे गए फोटोग्राफ्स की जुगलबंदी ....कुल मिलाकर मन खुश हो गया .आपके कवि,लेखक से तो परिचित था .आज आपके अन्दर बैठे डिजाइनर से भी परिचय कर लिया .बहुत बहुत बधाई आपको एवं डा.देशबंधु और डा.नागेश जी को . हेमंत कुमार
- March 2, 2009 5:00 AM
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अरविंद राज ने कहा… - होली के प्राकृतिक रंगों से रंगी इस कविता ने हृदय को सराबोर कर दिया। उत्तम रचना के प्रकाशन हेतु सरस पायस को बधायी।
- March 9, 2009 9:01 PM
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