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सोमवार, जनवरी 03, 2011

ख़ुशियों का गहना : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत

ख़ुशियों का गहना


मेरे घर आई नयना,
बनकर प्यारी-सी बहना!

फूलों से ख़ुशबू लाई,
तारों से लाई झिलमिल!
सबका मन सरसाती है,
हँसती है जब खिल खिलखिल!
बनकर ख़ुशियों का गहना!

कोयल-सी बोली लाई,
भौंरे-सी लाई गुनगुन!
सबका मन हरसाती है,
उसकी पायल की रुनझुन!
बनकर नयनों का सपना! 


रावेंद्रकुमार रवि 
(चित्र में हैं : सरस पायस की बहना नयना और भाई प्रियांशु)

5 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

अरे वाह...!
रनझुन की बहना तो बहुत सुन्दर लग रही है!
---
बालगीत भी बहुत अच्छा लिखा है आपने!

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर दोनो भाई बहिन। आशीर्वाद। आपको सपरिवार नये साल की हार्दिक शुभकामनायें।

माधव( Madhav) ने कहा…

congrtas

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाई बहिन का बहुत सुंदर चित्र धन्यवाद

रंजना ने कहा…

वाह..... मुग्धकारी सरस अतिसुन्दर बालगीत...

रचना पढ़ मन आनंदित हो गया.. और भाई बहन का यह सुन्दर चित्र तो चित्त लुभा लेने वाला है.....

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