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बुधवार, जनवरी 19, 2011

आओ पास, तुम्हें नहलाऊँ : चंद्रमोहन दिनेश

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आओ पास, तुम्हें नहलाऊँ
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सुअर, सुअर, ओ मेरे भइया!
चले झूमते भरी तलइया!

कितने गंदे रहते हो तुम!
साफ़ नहीं क्यों रहते हो तुम?

आओ पास, तुम्हें नहलाऊँ!
तुमको अपने साथ खिलाऊँ! 
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चंद्रमोहन दिनेश 
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सुअरों के चित्र : गूगल सर्च से साभार
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3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

बहुत बढ़िया बालगीत!
कोई तो मिला जो सूअर को भइया कह सके!

mrityunjay kumar rai ने कहा…

वाह वाह

राज भाटिय़ा ने कहा…

भाई हो तो ऎसा :)

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