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मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

बातचीत : भगवान से - रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत

रावेंद्रकुमार रवि
हम शोभा बन जाएँ











हे ईश! तुम्हारा हर पल हम गुण गाए!

हमको ऐसे ज्ञान-दीप दो, कभी न जो बुझ पाए !
हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...

आए जितनी भी बाधाए, सबका भंजन कर दें!
हर निराश मन में आशा का सुमधुर गुंजन भर दें!
नवकलिकाओं-सी कोमल मुस्कान सदा हम पाए!
हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...

सदा दूसरों का हित सोचें, अपनी सुविधा त्यागें!
च-नीच की बात न सोचें, भाग्य सभी के जागें!
जात-पात का भेद भूलकर, समता को अपनाए!
हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...

घृणा-द्वेष-छल की भाषा का दूर करें हम क्रंदन!
सदा तुम्हारा और प्यार का ही हो हमसे वंदन!
प्रीत के सुंदर आलेखन की हम शोभा बन जाए!
हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...

रावेंद्रकुमार रवि
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चारुबेटा,
खटीमा, ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड (भारत) - 262 308.

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13 टिप्‍पणियां:

ज्योति सिंह ने कहा…

घृणा-द्वेष-छल की भाषा का दूर करें हम क्रंदन!

सदा तुम्हारा और प्यार का ही हो हमसे वंदन!

प्रीत के सुंदर आलेखन की हम शोभा बन जाएँ!

हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...
bahut sundar bhav ,nav varsh mangalmaya ho aapko .

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

गीत में निहित सुंदर ईश्वर की वंदना..भगवान हमें ऐसे ही विचार हमेशा देता रहे..बढ़िया लगा आपकी यह गीत..रवीन्द्र जी बधाई स्वीकारें!!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लगा आप का यह वंदना रुपी बाल गीत.
धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

अति सुन्दर गीत!!


यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

प्रवीण त्रिवेदी ने कहा…

सदा दूसरों का हित सोचें, अपनी सुविधा त्यागें!
ऊँच-नीच की बात न सोचें, भाग्य सभी के जागें!
जात-पाँत का भेद भूलकर, समता को अपनाएँ!
हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...


मन हर्षित हुआ !!
आभार!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मेल से प्राप्त आदरणीय आचार्य जी का संदेश -

RAVI JI
KYA BAAT H BAHUT KHOOB!
AAJ TO MAJA AA GAYA.
YEH H NAYE SAAL KA TOHFA.
MAN GAYE USTAD.
THANKS
--
RAMESH SACHDEVA (DIRECTOR)
HPS SENIOR SECONDARY SCHOOL
A SCHOOL WHERE LEARNING & STUDYING @ SPEED OF THOUGHTS
M. DABWALI-125104

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मित्र
डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी द्वारा
मेल से भेजा गया संदेश -

"geet bahut hee pyara hai bhai,badhai"

पूनम श्रीवास्तव ने कहा…

रावेन्द्र जी,
काफ़ी दिनों बाद आप का एक बहुत ही सुन्दर और बच्चों के लिये उपयोगी
गीत पढ़कर अच्छा लगा।शुभकामनायें।
पूनम

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

हे ईश! तुम्हारा हर पल हम गुण गाएँ!

हमको ऐसे ज्ञान-दीप दो, कभी न जो बुझ पाएँ !
हे ईश! तुम्हारा ... ... ... ... ... ... ...

बहुत सुन्दर बालगीत है। इसे पिछले वर्ष भी पढ़ चुका हूँ,
लेकिन जितनी बार पढ़ता हूँ, उतना ही अच्छा लगता है।
नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

C.M. Rawal ने कहा…

आपका प्रयास बहुत ही सुंदर एवं सार्थक है। बाल मन को छू लेने वाले गीत बहुत ही मधुर एवं मोहक हैं। बधाई स्वीकारें।

चन्द्र मोहन रावल

GK Khoj ने कहा…

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GK Khoj ने कहा…

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SNK Social Fame ने कहा…

Thanks for this post it is really superb and amazing post it is very informative post.

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