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बुधवार, मई 25, 2011

टर्र-टर्र-टूँ-टर-टर-टर : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत


आजकल "सरस पायस" की छुट्टियाँ चल रही हैं!
वह मेरे साथ है! 
कल हम एक पार्क में घूमने गए! 
वहाँ बने कमल-कुंज में हमें एक मेढक मिला! 
उसने मुझसे ख़ूब प्यारे-प्यारे फ़ोटो खिंचवाए! 
फिर मैंने उसे पकड़ा, तो वह चूहे-जैसा अभिनय करने लगा! 
सरस पायस ने उसकी इस अदा को भी कैमरे में क़ैद कर लिय़ा! 
आज इन चित्रों को पुन: देखा, तो यह गीत रच गया! 
आप सब  भी इसे पढ़कर आनंद लीजिए!


टर्र-टर्र-टूँ-टर-टर-टर


कमल-कुंज के पत्तों में से
झाँक रहा मेढक हँसकर!


देख रहा है टुकुर-टुकुर यह
कब बरसेगा पानी?
कब आएगी लड्डू लेकर
इसकी प्यारी नानी?
नानी से यह बात करेगा -
टर्र-टर्र-टूँ-टर-टर-टर!


तबला बजा-बजा पत्तों का
छप-छप करके गाएगा!
फिसल-फिसलकर, तैर-तैरकर
मस्ती से भर जाएगा!
उछल-उछलकर दौड़ेगा, जब
पानी बरसेगा झर-झर!


रावेंद्रकुमार रवि

10 टिप्‍पणियां:

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

वाह जी हुजूर . क्या बात है . क्या अलमस्त फोटो हैं बधाई .

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

आज अभिनव सृजन में देखें -

हन्नी-हन्नी-हन्नी
कागा ले चवन्नी ,
कर मेरे सँग हन्नी
हन्नी-हन्नी-हन्नी .

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

आपका मेढक वाला यह बाल गीत भाई वाह वाह !

रंजन (Ranjan) ने कहा…

क्या बात है... कल हमें भी एक मेंढक दिखा.. बहुत प्यारा था...

Kashvi Kaneri ने कहा…

मेंढक का चित्र बहुत सजीव है …. लगता है अभी बाहर आजायेंगे …बाल गीत तो हमेशा की तरह सुन्दर और मजेदार हैं ।

संजय भास्कर ने कहा…

क्या बात है सुन्दर और मजेदार

Kailash C Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता ....बहुत सुन्दर फोटो..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर चित्रों से सजी प्रवाहमयी रचना!

सुनैना अवस्थी ने कहा…

आपकी बाल कविताएँ अजब अनोखी हैं . बच्चों के साथ साथ बड़ों का भी मन झूम जाता है .
मेरी एक पुस्तक पढ़ ले बिटिया नाम से प्रकाशित हुयी है .
मैंने भी अपनी बाल कविताओं का एक ब्लाग बनाया है . समय मिले तो आप देखिएगा . सुनैना अवस्थी

http://sunainaawasthi.blogspot.com/

घनश्याम मौर्य ने कहा…

प्रकृति के निकट रहने से बच्‍चों की सर्वेक्षण और विश्‍लेषण क्षमता बढृती है। छुट्टी में बच्‍चों को नई जगहें और नयी चीजें दिखाना चाहिए। उनका मनोरंजन भी होगा और जानकारी भी बढ़ेगी।

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