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बुधवार, फ़रवरी 24, 2010

सेब निराला : संगीता स्वरूप की एक शिशु कविता

सेब निराला
लाल-लाल है सेब निराला,
ख़ुश होता हर खानेवाला ।
जो है इसको प्रतिदिन खाता,
वह रोगों को दूर भगाता ।




संगीता स्वरूप

11 टिप्‍पणियां:

shikha varshney ने कहा…

waah..An apple a day keeps Dr. away.

राज भाटिय़ा ने कहा…

हम भी इस को नित दिन खाते, ओर ड्रा को दुर भगते

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत अच्छा संदेश.

मनोज कुमार ने कहा…

बेहतरीन। लाजवाब।

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

arey to bhai 2-4 saib idhar bhi bhej do...ha.ha.ha. acchhi mast kavita

me 2 lines mila du????

laal laal tamaatar hai
khatta-meetha ras wala hai
khaau to aankhe mich jaaye..
naa khaau to laar tapak jaaye...!

(HA.HA.HA.)

ACCHHI LAGI ????

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत बढिया वन एपल ए डे कीपस दा दाक्तर अवे । शुभकामनायें

रश्मि प्रभा... ने कहा…

laiye seb laal laal
main khaun aur tum khao
sab honge tandurust nihaal

sangeeta swarup ने कहा…

आप सबने प्रोत्साहित किया ...आभार

राज भाटिय़ा ने कहा…

गलती के लिये क्षमा...
मेरे कहने का अर्थ था कि सेब हम रोजाना ही खाते है, ओर डाकटर को दुर भगाते है, यानि रोग होगा ही नही तो डाकटर की क्या जरुरत, कल टिपण्णी लिखने के बाद ध्यान नही दिया, आज आप के मेल से पता चला. धन्यवाद

चंदन कुमार झा ने कहा…

बढ़िया ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सेव निराला बहुत लुभाता!
यह सब के मन को है भाता!!
एक सेव जो प्रतिदिन खाता!
रोगों को वो दूर भगाता!!

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