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गुरुवार, फ़रवरी 25, 2010

हो... हो... होली है : अरविंद राज का एक बालगीत

हो... हो... होली है !


मन में तरंग है,

तन में उमंग है ।

धरती रंगीली है,

अंबर सतरंग है ।

रंगों में रँगी हुई

मस्तों की टोली है ।

होली है...

हो... हो... होली है !

आज नहीं दिल में

है कोई मलाल ।

छेड़ रहे सब मिलकर

खुशियों की ताल ।

रंगों में आज भली

प्रेम-भंग घोली है ।

होली है...

हो... हो... होली है !

रंगों की धारों से

कोई ना बच पाया ।

फागुन के मौसम में

हर कोई पगलाया ।

अंबुआ पे बौराई

कोयलिया बोली है --

होली है...

हो... हो... होली है !
विं रा

कमल-कुंज, अनामिका डिज़ायनर्स एंड प्रिंटर्स,

हुसैनपुरा, बड़ी बिसरात रोड, शाहजहाँपुर (उ.प्र.) - 242 001.

8 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

इस साल आप सब की होली की रचनाये पढ कर ओर देख कर मन ललचाने लगा है होली खेलने के लिये, पिछले तीस साल से यह सब भुल चुके है... देखे शायद हम यहां सब मिल कर कोई प्रोगराम बनाये
बहुत सुंदर रचना.
धन्यवाद

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

भाटिया जी!
बहुत अच्छी बात है!
होली ज़रूर मनाइएगा!
हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं!
अपनी होली के बारे में बताइएगा भी ज़रूर!

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन होली गीत!!

Shalabh Gupta "Raj" ने कहा…

बहुत सुन्दर होली का गीत ... आपको बधाई .......होली की हार्दिक शुभकामनाएं....

शरद कोकास ने कहा…

होली का आनन्द बच्चों से अधिक कौन ले सकता है ?

Ravindra Ravi ने कहा…

रावेन्द्र जी होली मनाही चुके होंगे आप. कैसि रही होली?

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

रवि जी,
होली बहुत बढ़िया रही!

ज्योति सिंह ने कहा…

उमंगो व रंगों भारी सुन्दर रचना
आज नहीं दिल में


है कोई मलाल ।


छेड़ रहे सब मिलकर


खुशियों की ताल ।

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