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रविवार, फ़रवरी 21, 2010

श्रम करने से मिले सफलता : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक का गीत

के लिए "सरस पायस" को आशीष के रूप में मिला
का बालगीत इतना अच्छा है
कि मैं उसे पोस्ट के रूप में प्रकाशित करने से
अपने आप को रोक नहीं पाया!

श्रम करने से मिले सफलता
[22022009273.jpg]

खेल-कूद में रहे रात-दिन,
अब पढ़ना मजबूरी है ।
सुस्ती-मस्ती छोड़,
परीक्षा देना बहुत जरूरी है ।।

मात-पिता, विज्ञान-गणित हैं,
ध्यान इन्हीं का करना है ।
हिंदी की बिंदी को,
माता के माथे पर धरना है ।।

देव-तुल्य जो अन्य विषय हैं,
उनके भी सब काम करेंगे ।
कर लेंगे, उत्तीर्ण परीक्षा,
अपना ऊँचा नाम करेंगे ।।

श्रम करने से मिले सफलता,
कविता यही सिखाती है ।
रवि की पहली किरण हमेशा,
नया सवेरा लाती है ।।


9 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

रवि की पहली किरण हमेशा,
नया सवेरा लाती है ।।
बहुत उत्तम भाव लिए सरस कविता।

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया बाल गीत!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

टिप्पणी के रूप में रचे गये
मेरे बालगीत को सरसपायस पर
प्रकाशित करने के लिए
आभार!

JHAROKHA ने कहा…

बहुत सुन्दर और उपयोगी बालगीत-----आदरणीय शास्त्री जी को हर्दिक बधाई।

चंदन कुमार झा ने कहा…

सुन्दर !!!

ज्योति सिंह ने कहा…

श्रम करने से मिले सफलता,
कविता यही सिखाती है ।
रवि की पहली किरण हमेशा,
नया सवेरा लाती है ।।
upyogi baalgeet ,ati sundar

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मेल द्वारा प्रेषित संदेश --
--
आदरणीय शास्त्री जी का आशीर्वाद सरस पायस को
और उसके माध्यम से हम सबको मिल रहा है ।
यह बडी बात है ।
--
गिरिजा कुलश्रेष्ठ

ग्वालियर, मध्य प्रदेश (भारत)

sangeeta swarup ने कहा…

बच्चों को प्रेरणा देता खूबसूरत बाल गीत....

Suman ने कहा…

nice

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