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शुक्रवार, मई 21, 2010

हम भी उड़ते : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत



हम भी उड़ते



हम भी उड़ते आसमान में

जैसे उड़े पतंग!

सजाकर सुंदर-सुंदर रंग!


देख-देख जिनकी उड़ान हम

रह जाते हैं दंग,

वे चिड़ियाएँ उड़ें मज़े से

मस्त हवा के संग!

सजाकर ... ... .


उड़ती हैं तितलियाँ बाग़ में

भर पंखों में रंग,

रुक-रुक जो कहतीं फूलों से -

"चलो हमारे संग!"

सजाकर ... ... .


रावेंद्रकुमार रवि


9 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

अच्छी कविता है , तितलियाँ , पक्षी और पतंग

sangeeta swarup ने कहा…

वाह...बहुत प्यारा शिशुगीत ...और चित्र तो बहुत ही मनमोहक...

मनोज कुमार ने कहा…

22.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल करने के लिए इसका लिंक लिया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही प्यारा ओर सुंदर बाल गीत

सुलभ § सतरंगी ने कहा…

बहुत सुन्दर!!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर शिशुगीत.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत ही सुन्दर शिशु गीत है!
--
चित्र भी बहुत ही सुन्दर
तथा रचना के अनुरूप लगाये हैं!

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

ये तो बहुत प्यारा गीत है...मजा आ गया.

दीनदयाल शर्मा ने कहा…

Ravendr kumar Ravi ki shishu kavita "ham bhi udte"
...........The best Poem...Congratulation..

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