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सोमवार, अक्तूबर 18, 2010

अपलम-चपलम : डॉ. नागेश पांडेय संजय की नई पुस्तक

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श्री गांधी पुस्तकालय प्रकाशन, शाहजहाँपुर (उ.प्र.)
से प्रकाशित डॉ. नागेश पांडेय संजय की नई पुस्तक
नन्हे दोस्तों के लिए कुछ प्यारी-प्यारी कविताएँ लेकर आई है!
कविताओं के लिए चित्रांकन डॉ. ममता रंजन ने किया है तथा
रंग-रँगीले आवरण पृष्ठ को अरविंद राज ने सजाया है!
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- आइए अब पढ़ते हैं इस पुस्तक की ये चार शिशुकविताएँ -
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गड़बड़-सड़बड़
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हरा रंग होता हाथी का,
काँव-काँव वह करता।
हरी मिर्च उसको भाती है,
उसको ख़ूब कुतरता।

पंख बड़े होते भालू के,
मिनटों में उड़ जाता।
आसमान में ख़ूब मछलियाँ,
पकड़-पकड़कर खाता।

बड़ी चोंच होती चूहे की,
भौं-भौं-भौं-भौं करता।
साथ खेलता बिल्ली के वह,
पर चुहिया से डरता।

लंबी सूँड़ गाय की होती,
चुपके से वह आती।
चौके में घुस दूध-मलाई,
झटपट चट कर जाती।
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डॉ. नागेश पांडेय संजय
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इस संकलन की कविताएँ तो बढ़िया हैं ही,
पर उनसे भी बढ़िया है : इस पुस्तक का मूल्य : मात्र पाँच रुपए!
आवरण सहित २० पृष्ठों का इतना कम मूल्य
आजकल तो कहीं नज़र ही नहीं आता!
पुस्तकें मँगाते समय "सरस पायस" का उल्लेख करने पर
"सरस पायस" के पाठकों के लिए इसमें भी छूट है!
सौ रुपए की पुस्तकें क्रय करने पर पाँच पुस्तकें मुफ़्त में भेजी जाएँगी!
डाकखर्च भी आपको नहीं देना पड़ेगा!
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- पुस्तकें मँगाने के लिए संपर्क-सूत्र हैं -

डॉ. नागेश पांडेय संजय
सुभाषनगर (निकट : रेलवे कॉलोनी),
शाहजहाँपुर (उ.प्र.) - २४२००१.

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dr.nagesh.pandey.sanjay@gmail.com
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5 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुन्दर प्रस्तुति . धन्यवाद

रानीविशाल ने कहा…

पांडेय अंकल को नई पुस्तक के प्रकाशन की बधाई ......बहुत अच्छी लगी कविता .
अनुष्का

Coral ने कहा…

कविता सुन्दर है
नए पुस्तक कि बधाई

माधव( Madhav) ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

पुस्तक चर्चा के लिए आभार।

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