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बुधवार, दिसंबर 22, 2010

नाचे मोर : रावेंद्रकुमार रवि की नई शिशुकविता

नाचे मोर


देख बदरिया
करता शोर!
पर फैलाकर
नाचे मोर!

इसकी चाल
बहुत मस्तानी!
रंग-रँगीली
पूँछ सुहानी!

मुकुट सजा
इसके सर पर!
उड़ता है
फर-फर, फर-फर!

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कविता : रावेंद्रकुमार रवि

4 टिप्‍पणियां:

घनश्याम मौर्य ने कहा…

अच्‍छी कविता हैा शुक्र है इन्‍टरनेट पर एक ऐसा ब्‍लॉग तो है जहॉं बच्‍चों के लिए रचनात्‍मक कार्य के साथ साथ स्‍वस्‍थ मनोरंजन भी उपलब्‍ध हैा उत्‍तम प्रयास के लिए साधुवादा

mrityunjay kumar rai ने कहा…

सुंदर कविता

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

"Merry Christmas-मेरी क्रिसमस "
--
HAPPY CHRISTMAS.
--
सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट बाल चर्चा मंच परचर्चा में है!
http://mayankkhatima.uchcharan.com/2010/12/merry-christmas-32.html

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

बहुत खूब ... आपकी कविता भी और चित्र भी . बधाई मेरे भाई .

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