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बुधवार, फ़रवरी 16, 2011

तैराएँगे नइया : डॉ. मोहम्मद साजिद ख़ान का बालगीत

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तैराएँगे नइया
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छप-छप-छप-छप-छइया,
कर लो मेरे भइया!


पानी बरसे झर-झर,
मेढक बोलें टर-टर।
उछल-फिसल पानी में,
मस्त नाचती गइया।
छप-छप-छप-छप-छइया।


बिजली चमके चम-चम,
बादल गरजें थम-थम।
खिड़की के परदों से,
खेल रही पुरवइया।
छप-छप-छप-छप-छइया।


पेड़ सरसते हँसकर,
बहे पनारे झर-झर।
बगुला उड़ता जाए,
जैसे हो कनकइया।
छप-छप-छप-छप-छइया।


मौसम है यह प्यारा,
बहती है जलधारा।
खेलेंगे हम जमकर,
तैराएँगे नइया।
छप-छप-छप-छप-छइया।


डॉ. मोहम्मद साजिद ख़ान 
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(अंतिम चित्र में हैं : सरस पायस)
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7 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर बालगीत

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल गीत है!
कविता के अनुरूप चित्रों का चयन भी बहुत बढ़िया है!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर बालगीत जी, धन्यवाद

शुभम जैन ने कहा…

बहुत सुंदर गीत

धन्यवाद....

''मिलिए रेखाओं के अप्रतिम जादूगर से.....'

Saba Akbar ने कहा…

छप-छप-छप-छप-छइया....

सुन्दर गीत के साथ साथ प्रजेंटेशन भी बहुत खूबसूरत...

Mukesh Kumar Mishra ने कहा…

अच्छा शब्द दिया।

ZEAL ने कहा…

.

मनमोहक बाल गीत । मेरे बेटे कों बहुत पसंद आया ।

आभार ।

.

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