"सरस पायस" पर सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत है!

रविवार, फ़रवरी 06, 2011

रेल चली, भइ, रेल चली : रानीविशाल का बालगीत

----------------------------------------------------------------------
रेल चली, भइ, रेल चली
----------------------------------------------------------------------

झक-पक, छुक-छुक,
झक-पक, छुक-छुक।
रेल चली, भइ, रेल चली।



झक-पक, छुक-छुक,
झक-पक, छुक-छुक।
रेल चली, भइ, रेल चली।

जब दौड़े जंगल के अंदर,
इसे देखकर झूमे बंदर।
दौड़-दौड़कर पुल के ऊपर,
यह नदिया के पार चली।



झक-पक, छुक-छुक,
झक-पक, छुक-छुक।
रेल चली, भइ, रेल चली।

टा-टा करते उछल-कूदकर,
मोर नाचते इसे देखकर।
गाँव-शहर से होते-होते,
नानीजी के द्वार चली।



झक-पक, छुक-छुक,
झक-पक, छुक-छुक।
रेल चली, भइ, रेल चली।

हर मौसम में आती-जाती,
हमको सारा देश घुमाती।
नए दोस्तों से मिलवाती,
ख़ूब बढ़ाती प्यार चली।



झक-पक, छुक-छुक,
झक-पक, छुक-छुक।
रेल चली, भइ, रेल चली।

----------------------------------------------------------------------
♥♥ रानीविशाल ♥♥
----------------------------------------------------------------------
साभार : अपनी माँ "रानीविशाल" द्वारा अपने लिए रचित
यह गीत "सरस पायस" पर अपने सभी साथियों से
साझा करके अनुष्का "ईवा" बहुत ख़ुश है!

♥♥ संपादक "सरस पायस" ♥♥
----------------------------------------------------------------------

12 टिप्‍पणियां:

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
http://blogworld-rajeev.blogspot.com
SEARCHOFTRUTH-RAJEEV.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

इतना सरस बालगीत रचने के लिए रानी विशाल जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
यह रचना सरस पायस के मानक के अनुरूप है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जी धन्यवाद

सैयद | Syed ने कहा…

हम्म.. और इस गीत को पढ़ कर अनुष्का के दोस्त यानि के हम भी बहुत खुश है.. :)

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

सुंदर । बहुत सुंदर ... प्यारा सा गीत । हाँ , यह गीत बहुत-बहुत-बहुत ही सुंदर हो सकता है , यदि अंत मेँ प्रवाह ठीक हो जाए ।सब वाह ! वाह ! करेँगे । क्या विचार है मान्यवर ?

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर

संजय भास्कर ने कहा…

प्यारा गीत

संजय भास्कर ने कहा…

are wah anuska mama ji bhi aa gye

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

नागेश भाई,
आपका कहना बिल्कुल सही है!
--
ऐसा पहली बार हुआ है,
जब "सरस पायस" पर किसी गीत को
बिना संपादन किए प्रकाशित कर दिया गया!
--
मैं रानीविशालजी से विचार-विमर्श करके
इस प्रवाह को पूरी तरह से दूर करने का प्रयास करूँगा!
--
इस ओर ध्यान दिलाने के लिए
आपका आभारी हूँ!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

नागेश भाई से अनुरोध है --
क्या अब यह गीत प्रवाहमान हो गया है?
कृपया बताएँ!

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

मान्यवर , आप पाठकोँ के सुझावोँ को इतनी सहजता एवं गंभीरता से स्वीकार करते हैँ और फिर इतनी तत्परता के साथ सजग संपादन भी .,। बाल सखा और पराग जैसी पत्रिकाएँ भले ही आज बंद हैँ किँतु ऐसे ही संपादकोँ की दूरदृष्टि के फलस्वरूप ही आज भी उनका सानी नहीँ है । फिलहाल ... वाह ! वाह ! वाह ! आपके लिए भी और इस सरस गीत की रचनाकार रानी जी के लिए भी । बच्चे इसे मस्ती और पूरी तन्मयता के साथ गाएँगे और ऐसी अन्य श्रेष्ठ रचनाओँ की सोत्साह प्रतीक्षा करेँगे । बधाई... बधाई ...जी , बधाई ।

अनुष्का 'ईवा' ने कहा…

इस गीत को चार चाँद लगा कर यहाँ प्रकाशित करने के लिए ह्रदय से आभार ...

Related Posts with Thumbnails

"सरस पायस" पर प्रकाशित रचनाएँ ई-मेल द्वारा पढ़ने के लिए

नीचे बने आयत में अपना ई-मेल पता भरकर

Subscribe पर क्लिक् कीजिए

प्रेषक : FeedBurner

नियमावली : कोई भी भेज सकता है, "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ रचनाएँ!

"सरस पायस" के अनुरूप बनाने के लिए प्रकाशनार्थ स्वीकृत रचनाओं में आवश्यक संपादन किया जा सकता है। रचना का शीर्षक भी बदला जा सकता है। ये परिवर्तन समूह : "आओ, मन का गीत रचें" के माध्यम से भी किए जाते हैं!

प्रकाशित/प्रकाश्य रचना की सूचना अविलंब संबंधित ईमेल पते पर भेज दी जाती है।

मानक वर्तनी का ध्यान रखकर यूनिकोड लिपि (देवनागरी) में टंकित, पूर्णत: मौलिक, स्वसृजित, अप्रकाशित, अप्रसारित, संबंधित फ़ोटो/चित्रयुक्त व अन्यत्र विचाराधीन नहीं रचनाओं को प्रकाशन में प्राथमिकता दी जाती है।

रचनाकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे "सरस पायस" पर प्रकाशनार्थ भेजी गई रचना को प्रकाशन से पूर्व या पश्चात अपने ब्लॉग पर प्रकाशित न करें और अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित न करवाएँ! अन्यथा की स्थिति में रचना का प्रकाशन रोका जा सकता है और प्रकाशित रचना को हटाया जा सकता है!

पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!

"सरस पायस" बच्चों के लिए अंतरजाल पर प्रकाशित पूर्णत: अव्यावसायिक हिंदी साहित्यिक पत्रिका है। इस पर रचना प्रकाशन के लिए कोई धनराशि ली या दी नहीं जाती है।

अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।

आवृत्ति