-----------------------------------------------------------
जब "सरस पायस" के लिए
पाखी ने अपनी रंजनाएँ (पेंटिंग्स) भेजी थीं,
तब बहुत कोशिश करने पर भी मैं कुछ नहीं रच पाया था!
लेकिन इस बार की रंजनाएँ देखते ही
मेरा मन-मस्तिष्क खिल उठा और हर रंजना के लिए
एक-एक कविता मुस्कराने लगी!
-----------------------------------------------------------
सुंदर-सा पालना बनाया
-----------------------------------------------------------
 |
आइसक्रीम सूँघकर मुर्गा, बोला - "कैसे खाऊँगा? गला ख़राब हो गया यदि तो, कैसे बाँग लगाऊँगा?" ----------------------------------------------------------- |
 |
सूरज निकला, फूल खिल गया, बोला - "चिड़िया, गाओ! जिद छोड़ो, तुम गुड़िया रानी, तुम भी अब मुस्काओ!" ----------------------------------------------------------- |
 |
अंतरिक्ष से उड़कर आए,
कुछ अजीब-से लोग!
उन्हें देखकर तन्वी नाची,
नाचे वे सब लोग!
----------------------------------------------------------- |
 |
सुंदर-सा पालना बनाया,
झूल रही पाखी की बहना!
जैसे झूले मेरे घर पर,
झूम-झूमकर प्यारी नयना!
----------------------------------------------------------- |
-----------------------------------------------------------
चित्र : अक्षिता पाखी ♥♥♥ कविताएँ : रावेंद्रकुमार रवि
-----------------------------------------------------------