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रविवार, अगस्त 08, 2010

तब तक-तब तक : डॉ. नागेश पांडेय संजय का एक शिशुगीत

तब तक-तब तक
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कब तक-कब तक?
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!


रिमझिम-रिमझिम,
कब तक-कब तक?
बादल के झोलों में है जल,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

भूख लगी है,
कब तक-कब तक?
खाना-पानी दें ना नानी,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

मेल-दोस्ती,
कब तक-कब तक?
जब तक झगड़े को हम रगड़ें,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

कहो अँधेरा,
कब तक-कब तक?
हो ना जाए सुखद सवेरा,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!


डॉ. नागेश पांडेय संजय

14 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर शिशुगीत ....

कब तक-कब तक?
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!
यह तो हमसे ही नहीं बोला जा रहा ...:)

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

संगीता जी,
शिशुओं को ऐसे वाक्यों को बोलने की कोशिश में
जो मज़ा आता है, वह अतुलनीय होता है!
--
जैसे -
बोलकर देखिए -
कच्चा पापड़-पक्का पापड़
लगातार आप कितने बार बोल सकती हैं?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत ही सरल शब्दों सॆ रचा हुआ,
बच्चों के मन का गीत लगाया है!

रंजन ने कहा…

जब तक-जब तक, तब तक-तब तक!

आज आदि को बताता हूं.. मजा आएगा...

Akshita (Pakhi) ने कहा…

यह तो बहुत अच्छा है...

Shri"helping nature" ने कहा…

कहो अँधेरा,
कब तक-कब तक?
हो ना जाए सुखद सवेरा,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक

shandaar

माधव ने कहा…

सुन्दर गीत

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी ने कहा…

BAHUT SUNDAR GEET...BADHAI DR.NAGESH PANDEY JI...
AND RAVI JI...SUNDAR PRAKASHAN KE LIYE...

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

श्री "हेल्पिंग नेचर" (Shri"helping nature") की टिप्पणी का लिप्यांतरण -

शानदार
shandaar

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी की टिप्पणी का लिप्यांतरण -

बहुत सुंदर गीत...
BAHUT SUNDAR GEET...
बधाई डॉ. नागेश पांडेय जी...
BADHAI DR.NAGESH PANDEY JI...
एंड रवि जी...
AND RAVI JI...
सुंदर प्रकाशन के लिए...
SUNDAR PRAKASHAN KE LIYE...

Gopal Singh ने कहा…

माधव के जरिये यहाँ तक आया हूँ ,पत्रिका बहुत सुन्दर है

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मथुरा से ई-मेल द्वारा भेजा गया संदेश -

डॉ. नागेश पांडेय की बालकविता
dr nagesh pandey ki bal kavita
सुंदर तरीक़े से लगाई है।
sunder tarike se lagaee hai.
साधुवाद।
sadhubad.

डॉ. दिनेश पाठक शशि
dr.dinesh pathak shashi

rashmi ने कहा…

कहो अँधेरा,
कब तक-कब तक?
हो ना जाए सुखद सवेरा,
जब तक-जब तक, तब तक-तब तक
नयी आशा.....नयी शुरुआत......अच्छा लगा....

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