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रविवार, अगस्त 29, 2010

सात सुरों को अपने मन में बसाए : सरस चर्चा (11)

इंद्रधनुष के रंगों से सजी,
सात सुरों को अपने मन में बसाए,
यह कौन है, जो सरस पायस के मन को भाई है?
सबको मीठे-मीठे सरसगीत सुनाने आई है!

पहचानिए तो ज़रा!


और यह देखिए, चुलबुल की मस्ती!
वह कितनी ख़ुश है!

बारिश आई मेरे गाँव, पानी धोए मेरे पाँव!


नन्ही परी इशिता इस बार रक्षाबंधन पर "आरा" गई थी!
वहाँ उसे अपने ख़ूब सारे भाई-बहन मिले!
उसने उनके साथ मिलकर ख़ूब मस्ती की!


इशिता की मनभावन शरारतें आप भी देखिए
और मिलिए उसकी सबसे अच्छी सहेली से!


अब देखते हैं चिन्मयी का शिल्पगृह!
आप भी ऐसा शिल्पगृह बनाना अवश्य चाहेंगे!


इस बार रिमझिम ने अपने शिल्पगृह में
एक बैग तैयार किया है!
आप भी देखिए : यह कितना सुंदर है!


मैं भी अपने कपड़े
इतने ही सुंदर बैग में रखना चाहता हूँ!
पर क्या करूँ?
मुझे तो बनाना ही नहीं आता!
-------------
नन्हे-मुन्नों से मिलने एक बहुत अच्छी माँ आई है!

माँ की गोदी कितनी प्यारी,
नरम-मुलायम न्यारी-न्यारी!

इस माँ की गोदी को लेकर आई हैं - डॉ. मोनिका शर्मा!


उत्तर प्रदेश सचिवालय कालोनी, महानगर, लखनऊ में
सेक्रेट्रियेट वेलफेयर एसोसिएशन के तत्त्वावधान में
स्वतंत्रता-दिवस की 63वीं जयंती पर एक
चित्रकला-प्रतियोगिता आयोजित की गई,
जिसमें प्रतिभागियों द्वारा बहुत सुंदर-सुंदर चित्र बनाए गए!
प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया!
सभी चित्र देखने के लिए सीधे "बाल उद्यान" चलते हैं!


स्पर्श ने अपने ब्लॉग पर उगाया है,
यह प्यारा-सा सूरज!


- नन्हा मन से हेमंत कुमार का कहना है -

कपड़े साफ़ पहन के भैया,
दिल भी रहता सबका साफ़।


फुलबगिया पर मुनुमन चुहिया की करामात देखिए!
उसने बहुत मोटे कालू बिल्ले के भी राखी बाँध दी!
कैसे बाँधी?
यह जानने के लिए हेमंत कुमार की ही कहानी पढ़ने चलते हैं!


बाल-दुनिया में पढ़ते हैं आकांक्षा यादव की एक कविता!

प्यारी-प्यारी मेरी बहना, हरदम माने मेरा कहना!
पढ़-लिखकर मैं बड़ा बनूँगा, बहना को दूँगा उपहार!


...पर नारियल कित्ता भारी होता है!
मुझे तो इसे पकड़ने में ही बहुत मेहनत करनी पड़ी!


कुछ भी हो,
पर पाखी ने छोटे पेड़ से
नारियल तोड़ना भी सीख ही लिया है!
पाखी की दुनिया में जाकर आप भी देख सकते हैं!
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प्राची ने अपने भइया प्रांजल के
बहुत प्यार से राखी बाँधी!

DSC_0004

प्राची ने और किस-किस के राखी बाँधी!
यह देखने के लिए "नन्हे सुमन" पर चलते हैं!
---------------
"सरस पायस" पर इस बार उड़ी
रिमझिम की चिड़िया,
इंद्रधनुष के साथ-साथ
उसकी कविता गुनगुनाते हुए!


और यह देखिए, जादू क्या-क्या कर रहा है?

b

पिछले महीने उसे डॉक्‍टर अंकल से कई बार मुलाक़ात करनी पड़ी!
लेकिन उसकी मौज़-मस्ती में कोई कमी नहीं आई!

cz

और अंत में पढ़िए "सरस पायस" पर मेरी एक कविता!

. ... ... तो बहुत मज़ा आया!

नाव चलाई पानी में, तो बहुत मज़ा आया!
दौड़ लगाई पानी में, तो बहुत मज़ा आया!


रावेंद्रकुमार रवि
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(चित्र में है : सरस पायस)
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12 टिप्‍पणियां:

Coral ने कहा…

बहुत सुन्दर चर्चा आभार !

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बाल रचनाएँ पढ़कर मन बचपन की और लौट पड़ा है .... बहुत सुन्दर प्रस्तुति.....बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढ़िया चर्चा है जी!
नन्हे सुमन को शामिल करने के लिए आभार!

मनोज कुमार ने कहा…

सरस चर्चा का अनूठा और मनभावन अंदाज़ भाया।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत रंग- रंगीली चर्चा ...

राज भाटिय़ा ने कहा…

बारिश आई मेरे गाँव,
पानी धोए मेरे पाँव!
नन्ही परी तो सच मै बहुत प्यरी लगी जी, धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन चर्चा.

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

हिंदी द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।

माधव ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति

Akshita (Pakhi) ने कहा…

इस बार तो ढेर सारी चर्चा...सबके दिल को भाई.
____________________
'पाखी की दुनिया' में अब सी-प्लेन में घूमने की तैयारी...

rashmi ने कहा…

बेहद खुबसूरत अंदाज..

शुभम जैन ने कहा…

हमेशा की तरह एक सुन्दर सरस चर्चा लिए बहुत धन्यवाद....

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