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रविवार, अगस्त 15, 2010

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से : रावेंद्रकुमार रवि का शिशुगीत

आज मैं अपने विद्यालय में
स्वतंत्रता-दिवस पर आयोजित समारोह देखने पहुँची
इस नन्ही दोस्त के फ़ोटो खींचता रहा!




इसके बाद जब कार्यक्रम शुरू हुआ,
तो मुझे सरस्वती जी मिल गईं!
उनकी मुस्कान पर रीझकर मैं गीत रचने लगा!
- आप भी पढ़िए -

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से


सरस्वती जी, सरस्वती जी!
हमसे मिलने आओ ना!

पास हमारे बैठो कुछ पल,
हमको कुछ सिखलाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

हम हैं नन्हे मित्र तुम्हारे,
हमको गले लगाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

अच्छी है मुस्कान हमारी,
हमें देख मुस्काओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

साथ हमारे खेल-कूदकर,
बातें नई बताओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से,
ऐसा प्यार लुटाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

-----------------------------------------------------------------------

और ब्लॉगजगत में मिली जय हिंद करती
रिमझिम की यह मोहक मुस्कान -


♥♥ रावेंद्रकुमार रवि ♥♥

8 टिप्‍पणियां:

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

स्वाधीनता दिवस पर हार्दिक शुभकामानाएं.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत अच्छा गीत ...स्वतंत्रता दिवस के लिए बधाई

ज्योति सिंह ने कहा…

साथ हमारे खेल-कूदकर,
बातें नई बताओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!

जीवन-भर रह सकें ख़ुशी से,
ऐसा प्यार लुटाओ ना!
सरस्वती जी, आओ ना!
दोनो मां की वन्दना अति सुन्दर ,हार्दिक बधाई इस स्वन्त्रता दिवस की .

राजभाषा हिंदी ने कहा…

सुंदर गीत!


राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।

सहज साहित्य ने कहा…

भाई रवि जी ,आपने बच्चों के बीच जो उपहार पाया ,सबको पहुँचाया , इसके लिए मैं आभारी हूँ । अच्छा शिक्षक ईश्वर का सच्चा स्वरूप होता है ऽउर वह सब कुछ आप में है ।

निर्मला कपिला ने कहा…

देश का भविष्य इन नन्हें मुन्ने बच्चों और आपको स्वाधीनता दिवस पर हार्दिक शुभकामानाएं.

Chinmayee ने कहा…

धन्यवाद रविअंकल!

माधव ने कहा…

सुन्दर , स्वाधीनता दिवस पर हार्दिक शुभकामानाएं

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