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रविवार, सितंबर 19, 2010

नन्हे दोस्तों की रचनाओं से सजा चकमक का विशेषांक

(एक सौ एकवीं पोस्ट)

आज हम आपका परिचय एक अनोखी मासिक पत्रिका से करवा रहे हैं!


हर साल नवंबर में इसका एक विशेषांक प्रकाशित होता है!
"मेरा पन्ना विशेषांक"
इस विशेषांक को मुख्यत: नन्हे दोस्तों की रचनाओं से सजाया जाता है!
पिछले अंक की दो मज़ेदार कविताएँ पढ़िए!


यह देखिए : कितना मनभावन है, इसमें छपा यह चित्र!


संस्मरणों में बताई गई बातें भी कम मज़ेदार नहीं होतीं!


पहेलियाँ दिमाग को थोड़ा-सा परेशान करती हैं,
पर चुटकुले मन को गुदगुदा जाते हैं!


ऐसी चित्र-पहेली तो हर अंक में छपती है!
इसे भरने से ज्ञान और कौशल दोनों का विकास होता है!
इसे भरने में मज़ा तो आता ही है!


इसमें दी गई मथापच्ची दिमाग़ तेज़ करती है!


इस तरह का भी एक आकर्षण प्राय: हर अंक में होता है!


नन्हे साथी अपनी बात बहुत ही सच्चे मन से बताते हैं!


चकमक का सदैव यही कहना है!


यह है गत वर्ष के विशेषांक का मुखावरण!
इसे भी नन्हे साथियों की रचनाओं से ही सजाया जाता है!


और यह है चकमक का वो मेहनती समूह,
जो इसे सजाने-सँवारने के लिए दिन-रात पूरे उत्साह के साथ जुटा रहता है!


भोपाल (भारत) की संस्था एकलव्य इसका प्रकाशन करती है!


क्या कहा? नहीं!
तब तो इसे मँगाकर या तुरंत इसकी वेबसाइट पर जाकर
इसे पढ़ना शुरू कर दीजिए!
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चकमक का आगामी नवंबर 2010 का अंक भी होगा
"मेरा पन्ना विशेषांक"
इसके लिए आप भी अपनी रचनाएँ भेज सकते हैं!
प्रकाशित होने पर छ: माह तक पत्रिका आपको भिजवाई जाएगी!
जल्दी कीजिए!
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- रचनाएँ भेजने के लिए पते हैं -

संपादक : चकमक,
"एकलव्य", ई - 10, शंकरनगर,
बी.डी.ए. कॉलोनी, शिवाजीनगर,
भोपाल, म. प्र. (भारत) - 462016.

chakmak@eklavya.in
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9 टिप्‍पणियां:

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

चकमक का सदस्यता शुल्क इस प्रकार है -

एक प्रति : रु. 20.00
वार्षिक : रु. 200.00 (व्यक्तिगत) व रु. 300.00 (संस्थागत)
तीन साल : रु. 500.00 (व्यक्तिगत) व रु. 700.00 (संस्थागत)
आजीवन : रु. 3000.00 (व्यक्तिगत) व रु. 4000.00 (संस्थागत)

चंदा "एकलव्य" के नाम से बने चेक या मनीऑर्डर से भेजा जा सकता है!
भोपाल के बाहर के चेक में रु. 80.00 अतिरिक्त जोड़ें!
भेजने का पता है -

"एकलव्य",
ई - 10, शंकरनगर,
बी.डी.ए. कॉलोनी, शिवाजीनगर,
भोपाल, म. प्र. (भारत) - 462016.

भारत से बाहर रहनेवाले इस पते पर संपर्क कर सकते हैं -

ciculation@eklavya.in
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रंजन ने कहा…

बहुत प्यारी पत्रिका है.. आभार.

Coral ने कहा…

हम तो यहाँ मंगवा नहीं सकते लेकिन वेब के जरिये ही आनंद लेंगे

आपका शुक्रिया बहुत सुन्दर पत्रिका !

माधव ने कहा…

पत्रिका बहुत रोचक और लाभदायक लगी

Archana ने कहा…

धन्यवाद जानकारी के लिए ......

शरद कोकास ने कहा…

वाह ! बहुत अच्छा लगा । यह पत्रिका मेरे यहाँ पिछले 25 साल से आ रही है और मेरी बिटिया कोपल nanhikopal.blogspot.com)इसकी आजीवन सदस्य है ।
101 वी पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई ।

रानीविशाल ने कहा…

क्या कहने ! सब कुछ बहुत अच्छा है ...आभार
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का

चैतन्य शर्मा ने कहा…

आपने तो बड़ी अच्छी जानकारी दी.... हाथों से बनी कई तरह की शेप्स तो मुझे बहुत ही पसंद आयी...

Akshita (Pakhi) ने कहा…

अले वाह, यह तो बहुत अच्छी पत्रिका है. अब मैं भी पढूंगी.

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पूर्व प्रकाशित रचनाएँ पसंद आने पर ही मँगाई जाती हैं!

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अन्य किसी भी बात के लिए सीधे "सरस पायस" के संपादक से संपर्क किया जा सकता है।

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