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बुधवार, सितंबर 08, 2010

कबूतर के चूज़े : रावेंद्रकुमार की नई शिशुकविता

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♥♥ कबूतर के चूज़े ♥♥

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गुटर-गुटर-गूँ
करके तुमको,
रोज़ सुनाएँगे ये गान!

नन्हे-प्यारे
हैं ये चूज़े,
रखना इनका हरपल ध्यान!

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♥♥ रावेंद्रकुमार रवि ♥♥

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8 टिप्‍पणियां:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

वाह !
बहुत सुन्दर !

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar ने कहा…

बहुत बढ़िया शिशुगीत---रावेन्द्र जी,फोटो भी सुन्दर है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति।

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है।

काव्य प्रयोजन (भाग-७)कला कला के लिए, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

माधव ने कहा…

बहुत सुन्दर

डॉ. देशबंधु शाहजहाँपुरी ने कहा…

शिशुगीत बहुत प्यारा है रवि जी को बहुत बहुत बधाई

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मेल से प्राप्त लिप्यांतरित व अनूदित संदेश -

सुंदर कविता है। धन्यवाद।
sunder kavita hai.thanks.

डॉ. दिनेश पाठक शशि, मथुरा
Dr.Dinesh pathak shashi, mathura

बेनामी ने कहा…

Merie bahana yad karu ka tumko meri bahana,
ana tum jaldi pyari, pyari meri bahana.

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