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रविवार, सितंबर 12, 2010

गुदगुदी : अरविंद राज की नई शिशुकविता

गुदगुदी



मैं नन्हा-सा प्यारा बादल,
नीलगगन में घूम रहा हूँ!
ऊपर-नीचे, इधर-उधर, फिर उधर-इधर !

मुझे मचाती हुई गुदगुदी,
संग चल रही हवा सलोनी!
शोर मचाती, सरर-फरर, फिर फरर-सरर !



मस्त हवा की शैतानी से,
बड़ी नदी में छोटी नइया;
डोल रही है,डगर-मगर, फिर मगर-डगर !

बहुत ज़ोर बरसेगा पानी,
अपने बच्चे लेकर भागी;
बत्तख रानी, सटर-पटर, फिर पटर-सटर !



अरविंद राज

8 टिप्‍पणियां:

विवेक सिंह ने कहा…

बहुत सुन्दर !

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
काव्यशास्त्र (भाग-1) – काव्य का प्रयोजन, “मनोज” पर, आचार्य परशुराम राय की प्रस्तुति पढिए!

शरद कोकास ने कहा…

बहुत सुन्दर ध्वनि है इस कविता में ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ओर तीनो चित्र भी अति सुंदर. धन्यवाद

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

Bahut hi pyari bal kavita......
achha laga padhkar.

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश कि शीघ्र उन्नत्ति के लिए आवश्यक है।

एक वचन लेना ही होगा!, राजभाषा हिन्दी पर संगीता स्वारूप की प्रस्तुति, पधारें

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

कविता व चित्र देख कर मन खुश होगया ।

Akshita (Pakhi) ने कहा…

कित्ती प्यारी रचना और चित्र भी खूब...

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