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सोमवार, सितंबर 27, 2010

सब्जी ले लो, सब्जी : स्पर्श की कुछ मज़ेदार बातें

सब्जी ले लो, सब्जी!

आलू ले लो, प्याज ले लो,
बैंगन ले लो, गोभी ले लो,
सब्जी ले लो, सब्जी!

हरे-हरे मटर ले लो,
लाल-लाल टमाटर ले लो,
सब्जी ले लो, सब्जी!

अरे-अरे! बालश्रम तो अच्छी बात नहीं है!
फिर यह स्पर्श इतनी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर सब्जी क्यों बेच रहा है?

- आपको नहीं पता, तो जान लीजिए -
अपना स्पर्श बहुत अच्छा कलाकार भी है!

वह बहुत अच्छा अभिनय कर लेता है!
यह झलकी भी उसके बेहतरीन अभिनय की ही है!

एक आकर्षक परिधान प्रतियोगिता में वह
गली-गली घूमनेवाले एक सब्जी-विक्रेता की भूमिका निभा रहा है!


उसे चित्रकारी करने का बहुत शौक़ है!
देखिए कितना तल्लीन होकर चित्र बनाता है!


वह कितने सुंदर चित्र बनाता है,
उसका एक सुंदर नमूना यह देखिए!


यह देखिए स्पर्श का मनपसंद घर!
यह भी उसने ख़ुद ही बनाया है!


किताबें पढ़ना भी उसे बहुत पसंद है!
बाज़ार से घर लौटने तक वह एक-दो किताबें तो पढ़ ही डालता है!


१५ अगस्त को उसने यह टोपी और झंडा बनाया था!
टोपी पर उसने वंदे मातरम् भी लिखा था!
देखिए, कितना अच्छा है!


उसकी एक बहुत अच्छी दोस्त भी है!
शिमला की एक सुहानी शाम में
अपनी दोस्त चुलबुल के साथ उसकी चहलक़दमी देखिए!


स्पर्श की अंबिका मैम उसे बहुत अच्छा मानती हैं!


जब वह नन्हा था, तो ऐसे खिलखिलाता था!


और अब 5 साल की अवस्था में ऐसे मुस्काराता है!


चलते-चलते स्पर्श का एक नाच भी देख लेते हैं!

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10 टिप्‍पणियां:

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

शानदार प्रस्तुति .......

पढ़िए और मुस्कुराइए :-
आप ही बताये कैसे पार की जाये नदी ?

Akshita (Pakhi) ने कहा…

स्पर्श की रंग-बिरंगी दुनिया देखकर अच्छा लगा...बधाइयाँ.

शुभम जैन ने कहा…

बहुत अच्छा लगा स्पर्श से मिल कर....

ये आप बहुत अच्छा कर रहे है जो एक एक बच्चे से हमें मिलवा रहे है...इससे बच्चो का मनोबल तो बढ़ता ही है साथ ही इन उभरती हुई प्रतिभाओ से हमें भी मिलने का मौका मिलता है...
बहुत बहुत धन्वाद आपका.

माधव ने कहा…

शानदार प्रस्तुति

निर्मला कपिला ने कहा…

होनहार स्पर्श को बहुत बहुत आशीर्वाद। आभार स्पर्श से मुलाकात करवाने के लिये।

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह भाई हमारा स्पर्श तो बहुत होनहार है जी, हमारी शुभकामनायें

रंजन ने कहा…

कहाँ छुपा रखा था ये हीरा... और परिचय दे इन साहेब का..

बहुत प्रतिभाशाली है..

माधव ने कहा…

वैसे सब्जियां बहुत महंगी हो गयी है आज कल . २५ रुपये किलो नहीं पाँव

शरद कोकास ने कहा…

ऐसा लगता है हमने स्पर्श का स्पर्श किया है ।

चैतन्य शर्मा ने कहा…

apko to bahut se kaam aate hain... sparsh bhaiya.... kitni achhi baat
apke photo dekhkar maza aaya...

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