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शुक्रवार, नवंबर 26, 2010

फुदक-फुदककर : डॉ. नागेश पांडेय संजय की शिशुकविता

फुदक-फुदककर

नन्ही-सी प्यारी गौरइया,
मेरे घर पर आती है।
बिखरे दानों को चुगती है,
अपनी भूख मिटाती है।


फुदक-फुदककर आँगन में वह,
मेरा मन हरषाती है।
दौड़ो तो फुर से उड़ जाती,
फिर आँखें मटकाती है।

डॉ. नागेश पांडेय संजय

9 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चिड़िया (गौरैय्या) का गीत बहुत प्यारा है!

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

अपनी रचना देखी . आपने इसे क्या खूब सजाया है . आप पारखी संपादक हैं . द्रष्टि संपन्न प्रस्तोता हैं . आभारी हूँ .

चैतन्य शर्मा ने कहा…

अरे वाह सुंदर लगी कविता .... धन्यवाद नागेश अंकल .... धन्यवाद रवि अंकल

शुभम जैन ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता और पोस्ट पर चार चाँद लगता ये चित्र अति सुन्दर...
शुभकामनाये...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता है।।
नागेश जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
--
आपकी पोस्ट की चर्चा तो बाल चर्चा मंच पर भी लगाई है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/11/29.html

रानीविशाल ने कहा…

जीतनी सुन्दर रचना उतनी ही सुन्दर तस्वीर भी है ....आभार आप दोनों ही को !!
अनुष्का

घनश्याम मौर्य ने कहा…

गौरैया पर बहुत सुन्दर कविता लिखी है. गौरैया तो आज्कल तस्वीरो मे ही सिमट कर रह गयी है. वैसे मैने भी गौरैय पर स्वरचित कविता अपने ब्लोग पर पोस्ट की थी जिसका लिंक नीचे दिया गया है-
http://gmaurya.blogspot.com/2010/03/blog-post.html

अधीश प्रजापति ने कहा…

कविता पढकर मजा आया .नागेश अंकल आपको इतनी अच्छी कविता के लिए थेंक यू . .अधीश प्रजापति

Kajal Kumar ने कहा…

वाह यहां तो बच्चों का मेला लगा हुआ है. बढ़िया.

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