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शनिवार, जून 05, 2010

पेड़ लगाकर भूल न जाना : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत


पेड़ लगाकर भूल न जाना

आओ, हम सब पेड़ लगाएँ,
अपनी धरती ख़ूब सजाएँ!

पेड़ लगाकर भूल न जाना,
इनको पानी रोज़ पिलाना!
रोज़ सवेरे इन्हें चूमकर,
बहुत प्यार से फिर सहलाना!
इन पर बैठ सदा चिड़ियाएँ,
गीत ख़ुशी के हमें सुनाएँ!
आओ, हम सब ... ... .

पेड़ों को भाती है मस्ती,
इनकी छाया बिल्कुल सस्ती!
इनकी हरियाली से सजकर,
चहक-चहक गाएगी बस्ती!
इन पर फूल खिलें, मुस्काएँ,
सबका मन-मंदिर महकाएँ!
आओ, हम सब ... ... .
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रावेंद्रकुमार रवि
-------------------------------------------------------------
(चित्रों में : सरस पायस, सलोनी राजपूत, प्रियांशु ओम)
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22 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

गीत बहुत प्रासंगिक और प्रेरक है ।पेडों के प्रति यदि ऐसी संवेदना तथा अपने जीवन के प्रति ऐसी जागरूकता की आज सर्वाधिक आवश्यकता है ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

अरे वाह अमरुद का पोधा लगाया, ओर फ़िर सुंदर कविता भी, धन्यवाद

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

भाटिया जी,
यह चाँदनी का पौधा है
और इस पोस्ट में सभी पेड़-पौधों का
प्रतिनिधित्व कर रहा है!

M VERMA ने कहा…

पेड़ लगाकर भूल न जाना,
इनको पानी रोज़ पिलाना!
सुन्दर चित्रमयी झांकी सुन्दर सन्देश

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत ही प्रेरक बालगीत है!

Suman ने कहा…

nice

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं,
इनकी रक्षा करना होगा।
जीवन जीने की खातिर,
वन को जीवित रखना होगा।

तनिक-क्षणिक लालच को,
अपने मन से दूर भगाना है।
धरती का सौन्दर्य धरा पर,
हमको वापिस लाना है।।

अमिताभ मीत ने कहा…

बहुत सुन्दर !

Udan Tashtari ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति!

sangeeta swarup ने कहा…

प्रेरणादायक बालगीत.....सुन्दर चित्रों के साथ...

अक्षिता (पाखी) ने कहा…

अब तो मैं भी ऐसा ही करुँगी. प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखूंगी. सुन्दर बाल-गीत.


_______________________
'पाखी की दुनिया' में आज 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर 'वृक्ष कहीं न कटने पायें' !

ज्योति सिंह ने कहा…

upयोगी रचना ,मैं एक महीने बाहर रही इस कारन बहुत सी पोस्ट चूक गयी अब आती रहूंगी .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कल मंगलवार को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है



http://charchamanch.blogspot.com/

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

seedhi sadi ..aur mahatvapooran rachna...abhi kal hi global warming ke ek project ke liye ek get likh raha tha ..abhi bhi usi mode me hun ...to aap ki kavita aur jyada achhi lagi ..charchamanch ke raste yahaan tak pahuncha hun ...

माधव ने कहा…

प्रेरणादायक बालगीत

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर कविता है....

Chinmayee ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत ... प्रकृति की बात हमें कभी भूलना नहीं चाहिए !

सैयद | Syed ने कहा…

प्रेरक गीत... बहुत सुन्दर..

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" ने कहा…

प्रेरक प्रस्तुति के लिए धन्यवाद .

आज अभिनव सृजन http://abhinavsrijan.blogspot.com/
में पढ़िए --


बालगीत :नागेश पांडेय 'संजय '
आओ पेड़ लगाएँ
गरमी, वर्षा, शीत कड़ी
ये अविकल सहते जाते,
लू, आँधी, तूफान भयंकर
देख नहीं घबड़ाते।
सहनशीलता, साहस की
ये पूजनीय प्रतिमाएँ।

banwari lal sharma ने कहा…

बहुत अच्छे

Umesh Chandra ने कहा…

गीत बेहद सुन्दर और रोचक तो हैं ही साथ ही प्रेरक भी हैं... बधाई.

मैं अपने पत्र में अवश्य ही जिक्र करूँगा.. बधाई सर

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